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बिजली के ‘झटके’ से भड़के ग्रामीण, विभागीय दफ्तर का घेराव 50 हजार से एक लाख तक के बिल थमाने पर फूटा गुस्सा, बोले- विभाग की गलती का खामियाजा जनता क्यों भुगते

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बागेश्वर। जिले में बिजली के बढ़े हुए बिलों को लेकर लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को सरयू घाटी के सूपी-रीखाड़ी क्षेत्र के ग्रामीणों ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी के नेतृत्व में बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों ने अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता का घेराव कर गलत बिजली बिलों को तत्काल ठीक करने की मांग उठाई।
ग्रामीणों का आरोप है कि सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं को 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक के बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि जिन घरों में मुश्किल से दो-चार बल्ब और पंखे चलते हैं, वहां इतनी बड़ी राशि के बिल भेजे जाना विभाग की घोर लापरवाही को दर्शाता है।
घेराव के दौरान अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस भी हुई। विभाग की ओर से बिलों में हुई गड़बड़ी को मीटर रीडिंग की त्रुटि बताते हुए कहा गया कि पूर्व में कम रीडिंग दर्ज होने के कारण अब संचित यूनिटों का बिल एक साथ जारी हुआ है। हालांकि ग्रामीणों ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने कहा कि यदि मीटर रीडरों और संबंधित एजेंसियों ने समय पर सही रीडिंग दर्ज नहीं की तो उसकी सजा जनता को क्यों दी जा रही है। उन्होंने कहा कि विभागीय लापरवाही के कारण आज हजारों उपभोक्ता दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पहले लोगों को भारी-भरकम बिल थमा दिए जाते हैं और फिर उन्हें सुधार कराने के लिए मजदूरी छोड़कर अधिकारियों के सामने गुहार लगानी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि गलती विभाग की है, लेकिन उसका आर्थिक और मानसिक बोझ आम जनता पर डाला जा रहा है। यह स्थिति किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही गलत बिलों को निरस्त कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल युग में भी यदि बिजली विभाग उपभोक्ताओं को सही बिल उपलब्ध नहीं करा पा रहा है तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता है। अब लोगों की निगाह प्रशासन और सरकार की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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