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पुश्तैनी जमीन को लेकर पूर्व सैनिक का धरना, प्रशासन ने विवादित स्थल का किया निरीक्षण,सोलर प्लांट तीन दिन में हटाने के निर्देश

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बागेश्वर। न्याय की मांग को लेकर कलक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे मजगांव निवासी पूर्व सैनिक महिपाल सिंह रावत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व सैनिक का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। तहसील से लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं होने पर उन्होंने दो दिन पूर्व अपने भतीजे संजय के साथ कलक्ट्रेट परिसर में धरना शुरू किया था। उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी ने भी पूर्व सैनिक के आंदोलन को समर्थन दिया।
मामला बढ़ने के बाद उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, पटवारी और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम दलबल के साथ विवादित स्थल पर पहुंची और भूमि का निरीक्षण किया। इस दौरान संघर्ष वाहिनी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौके पर मौजूद रहे। निरीक्षण के बाद प्रशासनिक टीम ने एक बार फिर संबंधित भूमि को सरकारी भूमि बताया। प्रशासन के इस दावे पर पूर्व सैनिक महिपाल सिंह रावत और संघर्ष वाहिनी ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन पर उनके परिवार का लंबे समय से कब्जा और राजस्व अभिलेखों में उनके तथा उनके भाइयों के नाम दर्ज होने का दावा किया जा रहा है, उसे सरकारी भूमि कैसे बताया जा रहा है।

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सोलर प्लांट को तीन दिन में हटाने के निर्देश

मौके के निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने भूमि पर लगाए गए सोलर प्लांट को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। संबंधित व्यक्ति को तीन दिन के भीतर पूरा सोलर प्लांट हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में प्लांट नहीं हटाया गया तो नियमानुसार उसे जब्त कर नीलामी की कार्रवाई की जाएगी। पूर्व सैनिक और संघर्ष वाहिनी ने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन के अनुसार भूमि सरकारी है तो उस पर निजी व्यक्ति द्वारा सोलर प्लांट किस आधार पर स्थापित किया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। संघर्ष वाहिनी का कहना है कि भूमि से जुड़े दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि सरकारी भूमि पर निजी निर्माण या सोलर प्लांट स्थापित होने की स्थिति में संबंधित विभागों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। फिलहाल प्रशासन की ओर से सोलर प्लांट हटाने के लिए तीन दिन का समय दिए जाने के बाद मामला और गरमा गया है। पूर्व सैनिक और संघर्ष वाहिनी का कहना है कि जब तक भूमि विवाद का निष्पक्ष समाधान नहीं होता, तब तक वे मामले को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।

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