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शिक्षकों ने सीखी समूह-अभिनय, कहानी-कथन और रिटेलिंग की व्यावहारिक तकनीकें

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बागेश्वर (उत्तराखंड)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) बागेश्वर में आयोजित पाँच दिवसीय थिएटर इन एजुकेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम के तीसरे दिन तीनों विकासखंडों के 40 प्राथमिक शिक्षकों ने थिएटर-आधारित शिक्षण की कई महत्वपूर्ण विधियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। पूरे दिन का प्रशिक्षण संदर्भदाता सिमरन नागपाल और डिंपल मेहता (Soul Diets Foundation, Delhi) के मार्गदर्शन में संचालित हुआ।

दिन की शुरुआत एनसेंबलिंग (Ensembling) गतिविधियों से हुई, जिसके माध्यम से शिक्षकों ने सीखा कि किस प्रकार समूह में तालमेल, सहयोग और आपसी समझ विकसित कर कक्षा-कक्ष को अधिक सहभागितापूर्ण बनाया जा सकता है। संदर्भदाताओं ने बताया कि एनसेंबलिंग बच्चों में टीमवर्क, भरोसा और नेतृत्व क्षमताओं को विकसित करने में अत्यंत प्रभावी तकनीक है।

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इसके बाद शिक्षकों ने स्टोरीटेलिंग और रिटेलिंग की कला का अभ्यास किया। विभिन्न कहानियों को आवाज़, गति, चेहरे के हाव-भाव और शारीरिक अभिव्यक्ति के साथ प्रस्तुत करने के अभ्यास कराए गए, जिससे शिक्षकों को यह समझ आया कि कहानी-कथन छात्रों की रुचि, समझ और भाषा कौशल को किस प्रकार बढ़ाता है। रिटेलिंग—अर्थात कहानी को पुनः अपने शब्दों में कहना—का अभ्यास भी कराया गया, जो विद्यार्थियों की स्मृति, कल्पनाशीलता और आत्मविश्वास को मजबूत करता है।

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कविता और अभिनय के संयोजन पर भी ध्यान दिया गया, जिसमें दिखाया गया कि कैसे एक साधारण कविता को आवाज़, लय और अभिनय के माध्यम से बच्चों के लिए दिलचस्प और यादगार बनाया जा सकता है। शिक्षकों ने बताया कि ऐसी गतिविधियाँ कक्षा को अधिक जीवंत बनाती हैं और बच्चे सीखने की प्रक्रिया से स्वाभाविक रूप से जुड़ जाते हैं।

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डायट प्राचार्य चक्षुष्पति अवस्थी ने दिनभर की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि थिएटर बच्चों के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को एक साथ गति देता है और यह प्रशिक्षण शिक्षकों को नई शिक्षण संभावनाओं से जोड़ रहा है।
कार्यक्रम समन्वयक रवि कुमार जोशी ने कहा कि NEP 2020 अनुभवात्मक शिक्षण, कला-एकीकरण और बहुआयामी अधिगम पर विशेष ज़ोर देती है, और तीसरे दिन का प्रशिक्षण उसी उद्देश्य की एक सफल कड़ी साबित हुआ है।

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