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भाषाओं के इंद्रधनुष से जुड़ रहे विद्यार्थी,मातृभाषा कुमाऊँनी के माध्यम से सीख रहे संस्कृति, संवाद और ज्ञान

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बागेश्वर : अटल उत्कृष्ट पदम सिंह परिहार राजकीय इंटर कॉलेज वज्यूला में भारतीय भाषाओं पर आधारित सात दिवसीय समर कैंप का हुआ शुभारंभ। आज बुधवार 27 मई से 2 जून तक इंटर कॉलेज वज्यूला में भारतीय भाषाओं पर आधारित समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है। कैंप का उद्देश्य छात्र- छात्राओं को भारतीय भाषाओं, मातृभाषाओं, लोकसंस्कृति एवं भाषाई समृद्धि से जोड़ते हुए उनमें संवाद कौशल, खोजी प्रवृत्ति एवं रचनात्मकता का विकास करना है।
कैंप के प्रथम दिवस पर भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता आलोक पांडे एवं कला अध्यापिका राजेश्वरी कार्की के निर्देशन में विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की मातृभाषा कुमाऊँनी को केंद्र में रखते हुए उसके पूर्व ज्ञान को नवीन ज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया गया। छात्र-छात्राओं को कुमाऊँनी भाषा के ऐसे क्लिष्ट एवं विलुप्तप्राय शब्दों की जानकारी दी गई जिनका प्रयोग वर्तमान समय में धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। साथ ही हिंदी शब्दों के कुमाऊँनी अर्थ एवं कुमाऊँनी शब्दों के हिंदी अर्थों को समझाने की रोचक गतिविधियाँ कराई गईं। कैंप में मुहावरों, लोकोक्तियों, लोकगीतों, अंताक्षरी एवं शब्द खोज गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को भाषा के व्यवहारिक एवं सांस्कृतिक पक्ष से परिचित कराया गया। विद्यार्थियों को विशेष शब्दों की सूची दी गई, जिन्हें वे आगामी दिनों में खोजकर उनके अर्थ, प्रयोग एवं सांस्कृतिक महत्व को जानेंगे। इस गतिविधि का उद्देश्य विद्यार्थियों में करके सीखने की भावना विकसित करना एवं उनमें खोजी प्रवृत्ति को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों ढोल, दमाऊँ एवं रणसिंघा आदि की जानकारी भी विद्यार्थियों को दी गई। मास्टर ट्रेनर द्वारा बताया गया कि इन वाद्य यंत्रों की अपनी सांस्कृतिक भाषा होती है, जिनके माध्यम से देवी-देवताओं के आह्वान से लेकर सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों तक अनेक परंपराएँ निभाई जाती हैं। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि इन वाद्य यंत्रों को सीखने एवं उनमें दक्षता प्राप्त करने के लिए निरंतर अभ्यास एवं समर्पण आवश्यक होता है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य दीपक आर्य ने कहा कि यह समर कैंप सात दिन तक संचालित होगा, जिसमें विभिन्न गतिविधियों एवं भारतीय भाषाओं की विविध जानकारियों से छात्र-छात्राओं को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत भाषाओं का समृद्ध देश है और विद्यार्थियों को भाषाई विविधता, उसके प्रयोग एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे कैंप विद्यार्थियों के संप्रेषण कौशल को सुदृढ़ करने के साथ-साथ उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी हेमंत कांडपाल ने बताया कि आधुनिकता एवं बदलती जीवनशैली के कारण हिंदी एवं कुमाऊँनी भाषा के अनेक शब्द विलुप्ति की कगार पर पहुँचते जा रहे हैं। यदि स्थानीय लोग अपनी मातृभाषाओं का नियमित प्रयोग नहीं करेंगे तो आने वाले समय में ये भाषाएँ धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाएँगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कुमाऊँनी भाषी व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह कम से कम अपने घर में कुमाऊँनी भाषा में संवाद अवश्य करे तथा उसकी व्याकरण एवं शब्द-संपदा को सीखने का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि शब्द ही किसी भाषा की वास्तविक शक्ति होते हैं। भाषा जितनी समृद्ध शब्दावली से युक्त होगी, उतनी ही प्रभावशाली एवं अभिव्यक्तिपूर्ण बनेगी। विद्यार्थियों को विविध एवं दुर्लभ कुमाऊँनी शब्दों से परिचित कराने का उद्देश्य यही है कि वे अपनी मातृभाषा को केवल बोलना ही नहीं, बल्कि उसे समझना, आत्मसात करना और गर्व के साथ प्रयोग करना भी सीखें। कार्यक्रम में गतिविधियों का कार्यक्रम का संचालन भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता आलोक पांडे ने किया। इस अवसर पर हिमानी उप्रेती, मेघा कोरंगा, चंद्रावती पांडे, हरीश फर्स्वाण, चन्दन नेगी, मनोज कुमार टम्टा, सत्येंद्र कुमार, उत्सव मेहता सहित अनेक छात्र-छात्राएँ एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

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