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सत्ता से सवाल करना पत्रकारिता का पहला और ज़रूरी दायित्व: राजेश जोशी

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अल्मोडा: साभार मीडिया फ़ाउंडेशन के तत्वाधान में नगरपालिका परिषद अल्मोड़ा के सभागार में मीडिया डायलोग के पहले अंक में वरिष्ठ पत्रकार और बीबीसी के पूर्व सम्पादक राजेश जोशी प्रमुख वक्ता रहे।

मीडिया और लोकतंत्र विषय पर बोलते हुए राजेश जोशी ने मीडिया और लोकतंत्र के ऐतिहासिक और वर्तमान सम्बन्धों पर अलग अलग घटनाक्रमों, क़ानूनों और पत्रकारिता के उसूलों और सिद्धांतों पर गहराई से बात रखी. उन्होंने कहा कि सत्ता किसी भी राजनीतिक दल की रही हो उससे, उसकी नीतियों और कार्यक्रमों के बारे में सवाल करना पत्रकारिता का पहला और ज़रूरी दायित्व है.

पत्रकारिता में जनसत्ता, आउटलुक और बीबीसी के अपने अनुभवों को साझा करते हुए राजेश जोशी ने बीते तीन दशकों में अलग अलग सरकारों के दौर में मीडिया के सामने खड़ी हुई चुनौतियों का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा 1878 के वर्नाकुलर ऐक्ट से लेकर आज़ादी के बाद कांग्रेस सरकारों के दौर में लाए गए डिफ़ेमेशन एक्ट सरीखे मीडिया की स्वतंत्रता को बाधित करने वाले क़ानूनों का ज़िक्र करते हुए वर्तमान दौर की चुनौतियों का ज़िक्र किया. उन्होंने मौजूदा केंद्र सरकार के मीडिया को लेकर रवैये की आलोचना करते हुए प्रस्तावित ब्रॉड्कासटिंग बिल के बाद सोशल मीडिया के ज़रिए पत्रकारिता कर रहे नए पत्रकारों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में आशंका ज़ाहिर की।

साभार मीडिया फ़ाउंडेशन के रोहित जोशी ने कहा कि अल्मोड़ा शहर में मीडिया को लेकर इस तरह के आयोजन समय समय पर किए जाएंगे जिसमें मीडिया से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों से अल्मोड़ा की सिविल सोसाइटी का इंटरेक्शन कराया जाएगा.

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रश्नों का दौर चला जिसमें लोगों ने राजेश जोशी से मीडिया से जुड़े सैद्धांतिक और व्यावहारिक सवाल पूछे. कार्यक्रम में पूरन चंद्र तेवाड़ी, हयात सिंह रावत, पीसी तिवारी, भावना पाण्डे, रीना साही, किरन आर्या, कमल जोशी, विनय किरौला, इश्वर जोशी, डी के काण्डपाल, शिवेंद्र काण्डपाल, मयंक पन्त आदि शामिल थे. कार्यक्रम का संचालन नीरज पांग्ती और रश्मी सेलवाल ने किया।

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