बागेश्वर। जिला अस्पताल बागेश्वर में गुरुवार को स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया, जब कपकोट से अल्मोड़ा रेफर की जा रही एक प्रसूता को एंबुलेंस में शिफ्ट करते समय स्ट्रेचर से गिरा दिया गया। महिला के सड़क पर गिरने के बावजूद एंबुलेंस कर्मियों द्वारा तत्काल मदद न किए जाने से मौके पर मौजूद लोगों में भारी आक्रोश फैल गया और अस्पताल परिसर में घंटों तक हंगामा और जाम की स्थिति बनी रही।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कपकोट क्षेत्र के पनौरागूंठ गांव निवासी 36 वर्षीय पूनम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट में एक बच्ची को जन्म दिया था। नवजात की हालत गंभीर होने पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिलाष द्वारा मां और नवजात को उच्च चिकित्सा केंद्र अल्मोड़ा रेफर किया गया था। जिला अस्पताल में औपचारिक प्रक्रिया के बाद उन्हें एंबुलेंस से आगे भेजा जाना था।
परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि एंबुलेंस में शिफ्टिंग के दौरान कर्मियों ने लापरवाही बरती, जिससे प्रसूता असंतुलित होकर सड़क पर गिर गई। महिला दर्द से कराहती रही, लेकिन एंबुलेंस स्टाफ ने तत्काल सहायता नहीं की। कुछ देर तक वे मूकदर्शक बने रहे, जिससे वहां मौजूद लोगों का गुस्सा भड़क उठा।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने स्वयं महिला को उठाकर दूसरी स्ट्रेचर के माध्यम से एंबुलेंस में सुरक्षित लिटाया। इस दौरान लोगों ने अस्पताल प्रशासन और 108 सेवा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते अस्पताल के बाहर सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। लोगों का कहना था कि जब मां और नवजात दोनों जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हों, ऐसे समय में इस प्रकार की लापरवाही न केवल अमानवीय है, बल्कि सीधे तौर पर मरीज की जान से खिलवाड़ है। उन्होंने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और आपात सेवाओं की नियमित निगरानी की मांग की। घंटों चले हंगामे के बाद प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप से स्थिति नियंत्रित की जा सकी। अधिकारियों के आश्वासन के बाद एंबुलेंस को अल्मोड़ा के लिए रवाना किया गया।








