70 वन पंचायतों के सरपंच सहित 120 प्रतिभागियों ने किया प्रतिभाग
बागेश्वर : चिंतन मंथन सभागार में प्रभागीय वनाधिकारी आदित्य रत्न की गरिमामयी उपस्थिति में “गैर काष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म” परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
कार्यशाला में प्रमुख वन संरक्षक (वन पंचायत), उत्तराखण्ड द्वारा गठित टीम—दीपक मधवाल (उप वन क्षेत्राधिकारी), हमेशा लाल शाह (उप वन क्षेत्राधिकारी) एवं डॉ. डी.के. जोशी (प्रशिक्षक)—द्वारा स्थानीय वन पंचायतों के सरपंचों एवं सचिवों को परियोजना की अवधारणा, उद्देश्य एवं क्रियान्वयन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
इस अवसर पर बागेश्वर वन प्रभाग की 70 वन पंचायतों के सरपंच/सचिव सहित कुल 120 प्रतिभागियों ने कार्यशाला में सहभागिता की। कार्यक्रम में उप-प्रभागीय वनाधिकारी श्रीमती तनुजा परिहार, वन क्षेत्राधिकारी श्री केवलानन्द पाण्डे, वन क्षेत्राधिकारी श्री दीप चन्द्र जोशी, वन क्षेत्राधिकारी श्री महेन्द्र सिंह गुसाईं सहित अन्य वन कर्मी भी उपस्थित रहे।
उत्तराखण्ड शासन द्वारा वन पंचायतों के माध्यम से एनटीएफपी (गैर काष्ठ वन उपज) के विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म हेतु 10 वर्षीय परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस परियोजना के अंतर्गत 150 वन पंचायतों के 1500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वनीकरण कार्य प्रस्तावित है, जिसमें जनपद बागेश्वर की 23 वन पंचायतों का चयन किया गया है।
परियोजना के अंतर्गत वन पंचायत क्षेत्रों में औषधीय एवं सुगंधित पौधों का उत्पादन किया जाएगा, जिनके विक्रय हेतु स्थानीय उद्योगों से समन्वय स्थापित किया जाएगा। इससे ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे तथा उनकी आय में वृद्धि होगी। यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक विकास के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसके अतिरिक्त, जड़ी-बूटी आधारित कृषि एवं प्रसंस्करण से उत्पादन, खेती, कटाई, प्रसंस्करण एवं वितरण के विभिन्न चरणों में रोजगार सृजन होगा। साथ ही, हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भोजन, परिवहन एवं स्थानीय वस्तुओं और सेवाओं पर व्यय बढ़ेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
प्रभागीय वनाधिकारी श्री आदित्य रत्न ने बताया कि वन पंचायतों की आय में वृद्धि हेतु स्थानीय जड़ी-बूटियों के उत्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह परियोजना वन पंचायतों को सशक्त बनाने के साथ-साथ उत्तराखण्ड को औषधीय एवं सुगंधित पौधों के संरक्षण, विकास एवं सतत उपयोग के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी।








