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बागेश्वर में ग्रामीण स्वरोजगार को नई दिशा,स्थानीय जड़ी-बूटियों से रोजगार की नई राह दिखा रहा आरसेटी

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बागेश्वर: ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान बागेश्वर में इन दिनों महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। संस्थान द्वारा संचालित 12 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभागियों को अगरबत्ती, धूप और पारंपरिक दिए बनाने की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। इस प्रशिक्षण में करीब 20 महिला और पुरुष प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जो स्वरोजगार के माध्यम से अपने भविष्य को संवारने की तैयारी कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्राकृतिक और स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार करना सिखाया जा रहा है। खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध जड़ी-बूटियों के प्रयोग से सुगंधित धूप और अगरबत्ती बनाने की तकनीक पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे स्थानीय संसाधनों को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। संस्थान के निदेशक सुखविंदर कादयान ने बताया कि आरसेटी वर्षभर विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना संस्थान का मुख्य उद्देश्य है। पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों को देखते हुए स्वरोजगार आज सबसे बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है। इसी सोच के तहत ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें कम पूंजी लगाकर आसानी से कार्य शुरू किया जा सके। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कच्चे माल की पहचान, मिश्रण तैयार करने, सुगंध निर्माण, पैकेजिंग और विपणन संबंधी जानकारी भी दी जा रही है, ताकि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे स्वयं का छोटा उद्योग शुरू कर सकें। वही प्रशिक्षणार्थियों ने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम की सबसे खास बात स्थानीय जड़ी-बूटियों की पहचान और उनके उपयोग की जानकारी रही।उन्होंने बताया कि पहले वे आसपास उगने वाली कई जड़ी-बूटियों के महत्व से अनजान थे, लेकिन अब उन्हें समझ आया है कि इन्हीं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर पर्यावरण हितैषी धूप और अगरबत्ती तैयार की जा सकती है। इससे न केवल स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

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