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अंकिता हत्याकांड मामले में हो न्यायिक जांच : हरीश रावत

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बागेश्वर : पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अंकिता वाले प्रकरण में सीबीआइ जांच की सिफारिश करनी थी। न्यायिक जांच की बात होनी थी। वीआइपी के विरुद्ध एफआइआर होनी थी। साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश की गई। यह कानूनन जुर्म है।

पूर्व सीएम रावत पत्रकार वार्ता में कहा कि साक्ष्य नष्ट करना किसी सामान्य व्यक्ति को बचाना नहीं था। अंकिता ने वीआइपी का नाम मरने से पहले लिया था। भाजपा अपने बुने जाल में स्वयं फंस गई है। अंकिता मामले को लेकर कांग्रेस पहले दिन से ही जनता की आवाज उठा रही है। रुद्रपुर खुशवंत आत्महत्या की घटना में एसएसपी तक फंस रहे हैं। यूएसनगर संवेदनशील जिला है। वहां नशा, शराब से लेकर अन्य तरह के सौदागार हैं। किसान की मौत का मामला गंभीर है। सुखवंत सिंह ने मरने से पहले पुलिस तथा एसएसपी पर आरोप लगाए है। वहां पुलिस वसूली कर रही है। कहा कि राज्य की डेमोग्राफी 80 प्रतिशत तक भाजपा ने खराब की है। कांग्रेस तो सिर्फ 10 वर्ष तक सत्ता में रही। सबसे अधिक भाजपा सत्ता में है। कहा कि भर्ती घोटाला में सबसे अधिक भाजपा का ही नाम आ रहा है। कहा कि कांगेस के पास आंतरिक लोकतंत्र है। इसलिए कांग्रेस में गुटबाजी दिखती है। जबकि चार वर्ष से पांच मंत्री के पद रिक्त हैं। भाजपा की गुटबाजी खुलकर इंटरनेट मीडिया पर आने लगी है। इस अवसर पर पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, पूर्व जिपंअ हरीश ऐठानी, राजेंद्र टंगड़िया, सुरेंद्र खेतवाल, बसंत कुमार, बालकृष्ण आदि उपस्थित थे।

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