बागेश्वर। जनता की समस्याओं के समाधान के लिए लगाए जाने वाले जनता दरबार पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे शामा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता भूपेंद्र कोरंगा मंगलवार को जिला कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। इस दौरान वह अपने साथ पेट्रोल की बोतल भी लेकर पहुंचे, जिससे जिला कार्यालय परिसर में कुछ देर तक हलचल का माहौल बना रहा। भूपेंद्र कोरंगा का कहना है कि क्षेत्र की सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य जनसमस्याओं को लेकर वह पिछले कई वर्षों से लगातार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने आवाज उठाते आ रहे हैं। इसके बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि वह जनता दरबार, तहसील दिवस और अन्य सरकारी मंचों पर अब तक 19 बार अपनी शिकायतें दर्ज करा चुके हैं। इतना ही नहीं, मांगों के समाधान के लिए उन्होंने और ग्रामीणों ने 12 दिन तक भूख हड़ताल भी की थी। आंदोलन के दौरान विभागों ने लिखित आश्वासन देकर हड़ताल समाप्त कराई, लेकिन महीनों बाद भी अधिकांश मांगें अधूरी हैं। 19 बार जनता दरबार में आ चुका हूं, 12 दिन भूख हड़ताल भी कर चुका हूं, लेकिन आज भी समस्याएं जस की तस हैं। जनता दरबार में लोगों की सुनवाई नहीं हो रही है। हर बार केवल आश्वासन देकर भेज दिया जाता है। कोरंगा ने बताया कि वह आज पेट्रोल लेकर जनता दरबार में पहुंचे थे ताकि प्रशासन तक उनकी पीड़ा और आक्रोश पहुंच सके। हालांकि उन्होंने कहा कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने आए थे। आज मैं अंतिम आश्वासन लेकर जा रहा हूं। यदि इस बार भी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो अगले जनता दरबार में हम चुप नहीं बैठेंगे। अब जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए। भूपेंद्र कोरंगा के साथ पहुंचे ग्रामीणों ने भी प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद सड़क निर्माण, बिजली बिलों की गड़बड़ी और अन्य मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र के लोग बड़ा जनआंदोलन छेड़ने को मजबूर होंगे। वहीं जिला कार्यालय में पेट्रोल लेकर पहुंचने की घटना भी चर्चा का विषय बनी रही और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती रही कि आखिर वर्षों से शिकायतें लेकर भटक रहे लोग इस स्तर तक निराश क्यों हो रहे हैं। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य विजया कोरंगा एवं अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।








