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शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए नवाचार और नए दृष्टिकोण जरूरी : पार्वती दास

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अनुसूचित जाति जनजाति शिक्षक एसोसिएशन के तत्वावधान में शैक्षिक संगोष्ठी एवं त्रिवार्षिक जिला अधिवेशन आयोजित

अनुसूचित जाति जनजाति शिक्षक एसोसिएशन के तत्वावधान में शैक्षिक संगोष्ठी एवं त्रिवार्षिक जिला अधिवेशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा की गुणवत्ता, वर्तमान शैक्षिक चुनौतियों, शिक्षण पद्धतियों में बदलाव और उनके समाधान को लेकर शिक्षकों एवं पदाधिकारियों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में विधायक पार्वती दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

मुख्य अतिथि विधायक पार्वती दास ने कहा कि शिक्षा समाज के विकास की आधारशिला है। शिक्षकों की भूमिका केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम तक सीमित रखने की नहीं, बल्कि उन्हें बदलते समय के अनुरूप ज्ञान, कौशल और बेहतर दृष्टिकोण प्रदान करने की भी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की शैक्षिक संगोष्ठियों के माध्यम से शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों और बदलते दृष्टिकोणों की जानकारी मिलती है। ऐसे आयोजन शिक्षकों को अपने अनुभव साझा करने और बेहतर शिक्षण व्यवस्था के लिए सामूहिक रूप से विचार करने का अवसर प्रदान करते हैं।

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प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राठी ने कहा कि संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के साथ-साथ शिक्षकों के सामने आने वाली समस्याओं पर चर्चा करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में शिक्षकों को भी नई तकनीक, नवाचार और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों के साथ स्वयं को अपडेट करना आवश्यक है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक, अभिभावक और समाज के बीच बेहतर समन्वय को जरूरी बताया।

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जिलाध्यक्ष सुनील धौनी ने कहा कि संगोष्ठी में शिक्षा के क्षेत्र की विभिन्न चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए संसाधनों के साथ-साथ शिक्षकों के अनुभव और नवाचारों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने संगठन की ओर से शिक्षकों की समस्याओं और शैक्षिक हितों को प्राथमिकता के साथ उठाने की बात कही।

संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों में सीखने की क्षमता विकसित करने के लिए पारंपरिक शिक्षण के साथ आधुनिक एवं गतिविधि आधारित तरीकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए समय-समय पर इस तरह के संवाद और संगोष्ठियों का आयोजन महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान संगठन की आगामी गतिविधियों और शिक्षक हित से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई।

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त्रिवार्षिक जिला अधिवेशन के दौरान संगठन के पदाधिकारियों एवं शिक्षकों ने संगठन को मजबूत बनाने तथा शिक्षा के क्षेत्र में सामूहिक रूप से सकारात्मक प्रयास करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक एवं संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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