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गणित शिक्षण को गतिविधि आधारित बनाने की दिशा में अहम कदम, डायट बागेश्वर में कार्यशाला का तीसरा दिवस रहा ज्ञानवर्धक

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बागेश्वर।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बागेश्वर में आयोजित पाँच दिवसीय गणित लैब गतिविधि विकास आधारित अभिमुखीकरण कार्यशाला का तीसरा दिवस 22 नवंबर को उत्साह और उपयोगी गतिविधियों के साथ सम्पन्न हुआ। जनपद के विभिन्न विद्यालयों से आए कुल 50 एलटी एवं सहायक अध्यापकों ने प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कक्षा-कक्ष में गणित को गतिविधि आधारित, सरल, व्यवहारिक और रुचिकर बनाना है।

मुख्य अतिथि डॉ. अनूप कुमार राजपूत ने किया सत्र का शुभारंभ

कार्यशाला के तीसरे दिन का शुभारंभ एनसीईआरटी, नई दिल्ली के प्रारंभिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. अनूप कुमार राजपूत द्वारा किया गया। उन्होंने गणित शिक्षण की वर्तमान चुनौतियों, गतिविधि-आधारित अधिगम और नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप एनसीएफ-2023 की अवधारणाओं पर विस्तार से चर्चा की।

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डॉ. राजपूत ने बताया कि दक्षता आधारित शिक्षा के लिए गणित को केवल सूत्रों और अभ्यास तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि बच्चों में अवधारणा आधारित समझ विकसित करना आवश्यक है।

Four Block Approach पर विस्तृत प्रशिक्षण

सत्र के दौरान डॉ. राजपूत ने Four Block Approach के बारे में विस्तार से बताया, जिसमें शामिल हैं—

1. Maths Talk – गणितीय संवाद द्वारा बच्चों में जिज्ञासा और तर्कशीलता का विकास

2. Skill Teaching – कौशल आधारित अध्यापन

3. Skill Practice – अभ्यास एवं अनुप्रयोग

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4. Maths Games – खेल-खेल में गणित सीखने की प्रक्रिया

उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों के साथ 1–2 मनोरंजक गतिविधियाँ भी कराईं, जिनसे यह प्रदर्शित हुआ कि कक्षा में सरल खेलों के माध्यम से बच्चों को कठिन अवधारणाएँ भी रोचक तरीके से सिखाई जा सकती हैं।

परीक्षा के तनाव को लेकर डायट प्राचार्य का महत्वपूर्ण संदेश

कार्यशाला के दौरान डायट बागेश्वर के प्राचार्य चक्षुष्पति अवस्थी ने बच्चों के परीक्षा तनाव को कम करने पर विशेष संबोधन दिया।
उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि इस संदेश को अपने विद्यालयों में प्रार्थना सभा में पढ़कर विद्यार्थियों को मानसिक रूप से सहज और आत्मविश्वासी बनाने में मदद करें।

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नए पाठ्यक्रम को लेकर प्रशिक्षुओं की शंकाओं का समाधान

कार्यक्रम समन्वयक बी. डी. पांडे के संचालन में प्रशिक्षणार्थियों ने नए पाठ्यक्रम में अध्ययन सामग्री कम किए जाने के संबंध में डॉ. राजपूत से प्रश्न पूछे।

उत्तर में उन्होंने स्पष्ट किया कि—

नई पुस्तकों में अनावश्यक भार हटाकर आवश्यक एवं मूलभूत सामग्री को प्राथमिकता दी गई है।शिक्षक और विद्यार्थी के बीच सीधा संवाद एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि अब “कम किताब, अधिक सीख” की अवधारणा पर काम किया जा रहा है, जिसमें विद्यार्थी गतिविधि और कौशल के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से सीखेंगे।

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