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एक साल बाद भी नहीं सुधरे आपदा में क्षतिग्रस्त रास्ते और पुलिया, पूर्व विधायक ने जताई नाराजगी

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बागेश्वर। कनलगढ़ घाटी के नान कन्यालीकोट क्षेत्र में आपदा से क्षतिग्रस्त पैदल रास्तों और पुलियाओं की स्थिति एक साल बाद भी जस की तस बनी हुई है। पौसारी, बैसानी और जगथाना क्षेत्र के गांवों में आपदा के दौरान कई संपर्क पैदल मार्ग और पुलिया क्षतिग्रस्त हो गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से समस्या प्रशासन के संज्ञान में होने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने करीब एक वर्ष पूर्व क्षेत्र का भ्रमण कर आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया था। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं और क्षतिग्रस्त रास्तों व पुलियाओं को जल्द दुरुस्त कराने की मांग प्रशासन के समक्ष उठाई थी। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई है।
पूर्व विधायक ने कहा कि आपदा के कारण घाटी के कई गांवों को जोड़ने वाले पैदल रास्ते और पुलिया क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर रास्ते पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित है। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में इन स्थानों पर खतरा और बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष से ही जिला पंचायत सदस्य बलवंत राम, क्षेत्र पंचायत सदस्य जसौद राम, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य कुन्दन दानू समेत क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर समस्या को प्रशासन तक पहुंचाया जा रहा है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
फर्स्वाण ने कहा कि क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों और पुलियाओं की समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में किसी बड़ी आपदा की स्थिति में ग्रामीणों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त मार्गों और पुलियाओं की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराने की मांग की।
इस दौरान बलवंत राम, जसौद राम, कुन्दन दानू, दिवान सिंह, हरीश गढ़िया, धाम सिंह गढ़िया, श्याम राम, दिवान राम, उम्मेद सिंह गढ़िया, कुन्दन गोस्वामी सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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