बागेश्वर। तीन लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में सिविल जज (सीडी)/अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बागेश्वर की अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर 3.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसमें से तीन लाख रुपये परिवादी को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे।
सिविल जज (सीडी)/अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट योगेन्द्र कुमार सागर की अदालत में विचाराधीन मामले में कांडाधार निवासी पूरन चन्द्र ने परिवाद दायर कर बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रवाईखाल में कार्यरत कर्मचारी राजा कुमार ने 22 जून 2025 को निजी कार्य और दुकान के लिए उनसे तीन लाख रुपये उधार लिए थे। इसके बदले आरोपी ने 16 नवंबर 2025 की तिथि का आईडीबीआई बैंक का चेक दिया।
परिवादी के अनुसार आरोपी के कहने पर आठ दिसंबर 2025 को चेक बैंक में प्रस्तुत किया गया, लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण नौ दिसंबर को चेक अनादरित हो गया। इसके बाद 15 दिसंबर 2025 को आरोपी को विधिक नोटिस भेजा गया, जो 16 दिसंबर को प्राप्त हुआ। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर मामला न्यायालय में दायर किया गया।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने दावा किया कि उसकी दुकान से हस्ताक्षरित चेक का दुरुपयोग किया गया है, लेकिन वह इस संबंध में कोई साक्ष्य या शिकायत न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सका। वहीं, परिवादी ने चेक, बैंक मेमो, विधिक नोटिस और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष साबित किया।
सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास और 3.10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। आदेश के अनुसार जुर्माने में से तीन लाख रुपये परिवादी को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे, जबकि 10 हजार रुपये राज्य सरकार के खाते में जमा होंगे। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।








