logo

काफलीगैर महाविद्यालय का शासनादेश अटका, 7 सितंबर तक जिओ जारी न होने पर आंदोलन की चेतावनी

खबर शेयर करें -

बागेश्वर। काफलीगैर क्षेत्र में प्रस्तावित महाविद्यालय की स्थापना का शासनादेश जारी नहीं होने से क्षेत्रीय जनता और छात्र-छात्राओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लंबे समय से महाविद्यालय की मांग कर रहे लोगों का कहना है कि शासन स्तर पर कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक शासनादेश जारी नहीं किया गया है। इससे क्षेत्र में असंतोष गहराने लगा है।

क्षेत्रवासियों के अनुसार, महाविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि दाताओं ने अपनी भूमि महाविद्यालय के नाम विधिवत रजिस्ट्री तक कर दी है। इसके बावजूद शासनादेश जारी होने में हो रही देरी को लेकर लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि काफलीगैर और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के स्थानों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में क्षेत्र में महाविद्यालय की स्थापना होने से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा।

यह भी पढ़ें 👉  छूटे पात्र मतदाताओं के पंजीकरण के लिए 08 से 10 अक्टूबर तक प्रत्येक मतदान केंद्र पर लगेंगे विशेष शिविर

क्षेत्रीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप करते हुए शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई कराने और महाविद्यालय का शासनादेश शीघ्र जारी करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि शासनादेश जारी करने को लेकर पूर्व में भी कई बार समयसीमा बताई गई, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी में 65 लाख की स्मैक के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, एक ट्रक ड्राइवर तो दूसरा दर्जी

7 सितंबर तक शासनादेश नहीं तो आंदोलन

क्षेत्रवासियों ने अब शासन को स्पष्ट समयसीमा दी है। ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी दी गई है कि यदि 7 सितंबर 2026 तक काफलीगैर महाविद्यालय की स्थापना का शासनादेश जारी नहीं हुआ, तो क्षेत्रीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ता धरना-प्रदर्शन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।

यह भी पढ़ें 👉  चुनाव ड्यूटी का भुगतान और अवैध चालान का मुद्दा गरमाया, टैक्सी यूनियन ने किया प्रदर्शन

आंदोलनकारियों ने कहा कि महाविद्यालय की मांग विद्यार्थियों के भविष्य और क्षेत्र की शैक्षिक जरूरतों से जुड़ी है। इसलिए शासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बिना किसी और देरी के शासनादेश जारी करना चाहिए। साथ ही चेतावनी दी गई कि तय समयसीमा तक मांग पूरी नहीं होने पर होने वाले आंदोलन की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad
Share on whatsapp