बागेश्वर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बागेश्वर में बुधवार से दो दिवसीय “परिवेशीय संसाधन आधारित अनुभवनात्मक भौतिकी कार्यशाला” का शुभारंभ हो गया। शिक्षा सोपान, कानपुर के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में विज्ञान शिक्षण को अधिक सरल, प्रयोगात्मक और व्यवहारिक बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कार्यशाला में पहुंचे देश के विख्यात भौतिक वैज्ञानिक एवं पद्मश्री सम्मानित एच.सी. वर्मा ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि “विज्ञान को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जब विद्यार्थी स्वयं प्रयोग करते हैं, तभी उनके भीतर जिज्ञासा और खोज की भावना विकसित होती है।” उन्होंने विज्ञान शिक्षण को स्थानीय परिवेश और अनुभवों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला में जनपद के विभिन्न विद्यालयों से आए 60 से अधिक विज्ञान शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों के माध्यम से विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक और विद्यार्थियों के दैनिक जीवन से जोड़ना है। इस दौरान प्रतिभागियों को कम लागत वाले विज्ञान प्रयोगों और गतिविधियों का प्रत्यक्ष अनुभव भी कराया गया। डायट के प्राचार्य चक्षुष्पति अवस्थी ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप अनुभवात्मक और गतिविधि आधारित शिक्षण समय की आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि डायट लगातार नवाचारपूर्ण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों को विज्ञान से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. भुवन चन्द्र ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में विज्ञान शिक्षण को रोचक, सुलभ और व्यवहारिक बनाना है। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर दैनिक जीवन और स्थानीय परिवेश से जुड़ना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि 21 मई को जनपद के विभिन्न विद्यालयों से 100 से अधिक छात्र-छात्राएं भी कार्यशाला में प्रतिभाग करेंगे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजीव जोशी ने किया। इस दौरान भवानी शंकर कांडपाल (केंद्रीय विद्यालय, कौसानी), अनुभव अवस्थी (सोपान आश्रम, कानपुर), विनोद जोशी और भुवन मेलकानी ने सुगमकर्ता के रूप में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय, डॉ. केएस रावत, डॉ. सीएम जोशी, डॉ. बीडी पांडेय, डॉ. संदीप कुमार जोशी, डॉ. दीपा जोशी और आलोक पांडेय सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा।








