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तीन माह से वेतन न मिलने पर पेयजल निगम कर्मियों का धरना शुरू, विभागीय दर्जे की मांग तेज

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बागेश्वर। अधिकारी/कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति, उत्तराखण्ड पेयजल निगम के आह्वान पर कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर आज से धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले तीन माह से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे उन्हें आर्थिक और पारिवारिक स्तर पर गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समिति के अध्यक्ष कैलाश सिंह ने बताया कि नियमित वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई, चिकित्सा और ऋण किस्तों का भुगतान जैसी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है और सरकार को शीघ्र समाधान निकालना चाहिए। समन्वय समिति की प्रमुख मांग है कि पेयजल निगम को राजकीय विभाग घोषित किया जाए। कर्मचारियों का तर्क है कि राजकीय विभाग का दर्जा मिलने से वेतन और पेंशन भुगतान की अनिश्चितता समाप्त होगी तथा वित्तीय व्यवस्था स्थिर होगी। जब तक निगम को राजकीय विभाग घोषित नहीं किया जाता, तब तक वेतन और पेंशन का आहरण सीधे कोषागार से किए जाने की व्यवस्था लागू की जाए। इसके अतिरिक्त समिति ने यह भी मांग रखी है कि वर्तमान सेंटेज व्यवस्था को समाप्त करते हुए पेयजल निगम कार्मिकों के अधिष्ठान व्यय का एकमुश्त प्रावधान किया जाए, जिसे सचिव के नियंत्रण में रखा जाए, ताकि प्रत्येक माह की पहली तारीख को नियमित रूप से वेतन और पेंशन का भुगतान सुनिश्चित हो सके।कर्मचारियों का कहना है कि वे पेयजल जैसी आवश्यक सेवा से जुड़े हैं, लेकिन स्वयं आर्थिक असुरक्षा में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है, ताकि आंदोलन की स्थिति समाप्त हो सके और कर्मचारियों को नियमित वेतन मिल सके। इस दौरान अधिशाषी अधिकारी विपिन कुमार,किशन सिंह,चंदन सिंह,नरेंद्र सिंह,चंद्रा देवी, मनोज खड़का,जयशंकर सिंह राणा,ललित सिंह कोरंगा,विनोद कुमार, लक्ष्मी कोरंगा,ज्योति कांडपाल आदि मौजूद रहे।

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