उत्तराखंड। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) द्वारा जारी प्रवक्ता भर्ती परीक्षा कैलेंडर और सीमित परीक्षा केंद्रों को लेकर प्रदेशभर के परीक्षार्थियों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। परीक्षार्थियों ने आयोग पर भेदभावपूर्ण परीक्षा कैलेंडर जारी करने और परीक्षा केंद्र केवल हल्द्वानी व हरिद्वार तक सीमित रखने का आरोप लगाते हुए इसे छात्रों के हितों के खिलाफ बताया है।
परीक्षार्थियों का कहना है कि राज्य में प्रवक्ता भर्ती पहले ही काफी देरी से आई है, ऐसे में आयोग द्वारा जारी परीक्षा कार्यक्रम ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। आरोप है कि आयोग ने कुछ विषयों के अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए बेहद कम समय दिया है, जबकि अन्य विषयों के उम्मीदवारों को अपेक्षाकृत अधिक समय मिला है। इससे परीक्षार्थियों के बीच असमानता और पक्षपात की भावना पैदा हुई है।
अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि यदि आयोग सभी विषयों की परीक्षाएं एक से दो महीने के भीतर आयोजित कर सकता है, तो कुछ विषयों के लिए सीमित तैयारी समय और कुछ को लंबी अवधि देने का औचित्य क्या है। उनका कहना है कि यह व्यवस्था प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
परीक्षार्थियों ने यह भी चिंता जताई कि कई विषयों की परीक्षा तिथियां उत्तर प्रदेश की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा तथा उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की अन्य परीक्षाओं से टकरा रही हैं। इससे कई अभ्यर्थियों के सामने परीक्षा चयन और तैयारी को लेकर गंभीर दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है।
इसके अलावा परीक्षा केंद्र केवल हल्द्वानी और हरिद्वार में बनाए जाने को लेकर भी दूरस्थ क्षेत्रों के परीक्षार्थियों में भारी असंतोष है। ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े अभ्यर्थियों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए इन शहरों तक पहुंचना, आवास और यात्रा खर्च उठाना आसान नहीं है। उनका कहना है कि आयोग को राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और परीक्षार्थियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए था।
परीक्षार्थियों ने आयोग से मांग की है कि संशोधित परीक्षा कैलेंडर जारी कर सभी विषयों की परीक्षाएं बरसात के मौसम के बाद, अक्टूबर से दिसंबर के बीच आयोजित की जाएं, ताकि सभी अभ्यर्थियों को पर्याप्त तैयारी का समय मिल सके और वे मानसिक दबाव से मुक्त होकर परीक्षा दे सकें।
साथ ही अभ्यर्थियों ने यह भी मांग उठाई है कि परीक्षा केंद्र केवल दो शहरों तक सीमित न रखकर राज्य के सभी जिलों में बनाए जाएं, जिससे दूर-दराज और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों को भी परीक्षा में शामिल होने का समान अवसर मिल सके।
परीक्षार्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।








