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राज्य आंदोलनकारियों का प्रदर्शन, विभिन्न मांगों को लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे

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बागेश्वर: उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने बुधवार को उत्तराखंड क्रांतिक दल की अगुवाई में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में प्रदर्शन किया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर राज्य निर्माण से जुड़े मुद्दों, मूलभूत सुविधाओं और जनहित से संबंधित कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं।
आंदोलनकारियों ने कहा कि पृथक पर्वतीय राज्य के लिए लंबे संघर्ष के बावजूद आज भी कई मूलभूत अपेक्षाएं अधूरी हैं। उन्होंने मांग की कि राज्य गठन के उद्देश्यों के अनुरूप नीतियों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण में स्थापित की जाए, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों की भावनाओं और राज्य आंदोलन के उद्देश्यों का सम्मान हो सके। परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर आंदोलनकारियों ने कहा कि यह केवल जनसंख्या के आधार पर न होकर पर्वतीय जनपदों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
आंदोलनकारियों ने राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुए लोगों की स्मृति में बनाए गए स्थलों के संरक्षण और उनकी समुचित देखरेख सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपदों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए विकास योजनाओं में विशेष प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में वन्यजीवों के बढ़ते आतंक पर भी चिंता जताई गई। बंदरों, जंगली सूअरों और अन्य वन्यजीवों से फसलों को हो रहे नुकसान से किसानों की स्थिति खराब होती जा रही है। इसके लिए प्रभावी कानून लागू करने और राहत देने की मांग उठाई गई। साथ ही, पर्वतीय क्षेत्रों में घटती कृषि और बढ़ते पलायन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया गया।आंदोलनकारियों ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में खाद्यान्न की समस्या को देखते हुए सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों के माध्यम से प्रत्येक परिवार को पर्याप्त मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा, चारागाहों के विस्तार और वन भूमि से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस नीति बनाने की मांग भी की गई। साथ ही यह भी मांग की गई कि राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी विभागों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाए और पेंशन संबंधी घोषणाओं को शीघ्र लागू किया जाए। पुराने पहचान पत्रों के नवीनीकरण तथा सभी पात्र आंदोलनकारियों को इसका लाभ देने की भी मांग उठाई गई। इसके अतिरिक्त, आंदोलनकारियों के लिए चिकित्सा सुविधाओं को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की गई, ताकि उन्हें सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में समुचित उपचार मिल सके। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान रमेश पांडे कृषक,भुवन कांडपाल, लीलाधर पांडा,राजेंद्र सिंह,मंगल सिंह,मोहन सिंह आदि मौजूद रहे।

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