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मनरेगा भुगतान में देरी से बढ़ी परेशानी, मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट

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बागेश्वर/गरुड़,
गरुड़ क्षेत्र में मनरेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूरों और कुशल मिस्त्रियों को लंबे समय से भुगतान न मिलने के कारण गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि जहां कुशल मिस्त्री और सामग्री का भुगतान पिछले तीन वर्षों से लंबित है, वहीं मजदूरों को पिछले चार माह से मजदूरी नहीं मिल पाई है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023-24 से मनरेगा के अंतर्गत कार्य करने वाले कुशल मिस्त्री भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। निर्माण कार्यों में उपयोग हुई सामग्री का पैसा भी अब तक नहीं मिल सका है। इसके साथ ही चार माह से मजदूरी का भुगतान न होने से मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मजदूर दिनभर काम करने के बाद शाम को भुगतान की उम्मीद रखते हैं, लेकिन भुगतान न होने से निराशा बढ़ रही है।
स्थिति यह है कि ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य (क्षेपंस) भी दबाव में हैं। वे मजदूरों को भुगतान करने के लिए उधार लेकर किसी तरह काम चला रहे हैं। वहीं एक अप्रैल से संबंधित ऑनलाइन साइट बंद होने के कारण भुगतान प्रक्रिया और अधिक प्रभावित हो गई है, जिससे गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार भी थम गई है। इस मुद्दे को लेकर पूर्व विधायक ललित फर्सवाण, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नरेंद्र बिष्ट सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने शीघ्र भुगतान न होने पर मजदूरों के साथ उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं खंड विकास अधिकारी ख्याली राम ने बताया कि वर्ष 2023-24 की योजनाओं का भुगतान हो चुका है। उन्होंने कहा कि हाल के चार माह का भुगतान लंबित है, जिसके लिए केंद्र सरकार को बिल सहित सूचना भेजी गई है और जल्द ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि बंद पड़ी साइट भी शीघ्र चालू हो जाएगी। भुगतान में देरी से जहां मजदूरों की आजीविका प्रभावित हो रही है, वहीं ग्रामीण विकास कार्यों पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।

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