बागेश्वर। तहसील एवं जिला बागेश्वर के ग्राम भैरुचोबट्टा में खड़िया (सोपस्टोन) खनन से आवासीय मकानों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर ग्रामीणों ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की तत्काल जांच और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किए जाने की मांग की।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम भैरुचोबट्टा निवासी मंगल कुमार और दया प्रकाश, पुत्र स्वर्गीय बीरेन्द्र प्रसाद, के आवासीय मकान उनकी निजी भूमि पर बने हुए हैं। उनके मकानों के समीप एक व्यक्ति को खड़िया खनन का पट्टा स्वीकृत है। आरोप है कि लगातार हो रहे खनन के कारण मकानों के आसपास की भूमि कमजोर हो गई है और भवनों पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
पीड़ितों ने बताया कि इस मामले में 15 अप्रैल 2026 को दोनों पक्षों के बीच एक लिखित अनुबंध हुआ था। अनुबंध के अनुसार, खनन पट्टा धारक ने जून 2026 से पहले प्रभावित परिवारों को अन्य सुरक्षित स्थान पर मकान बनाकर बसाने का आश्वासन दिया था, ताकि खनन कार्य से उनके जीवन और संपत्ति को कोई खतरा न हो।
ग्रामीणों का आरोप है कि अनुबंध की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद अब पट्टा धारक अपने वादे से पीछे हट गया है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से इनकार कर रहा है। उनका कहना है कि बरसात शुरू होने के कारण भूधंसाव और मकान ढहने का खतरा और बढ़ गया है। साथ ही, खनन के चलते उनकी अधिकांश कृषि भूमि भी प्रभावित हो चुकी है, जिससे उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक स्थान नहीं बचा है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की तत्काल स्थलीय जांच कराई जाए तथा मानसून के मद्देनजर प्रभावित परिवारों के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें शीघ्र सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।








