बागेश्वर। अल्मोड़ा के सिंकनी मैदान में आयोजित तथाकथित विराट हिंदू महासम्मेलन के मंच से प्रयुक्त भाषा तथा उसी मंच पर डॉ. बी.आर. आंबेडकर की तस्वीर लगाए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। कार्यक्रम के बाद विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने इसे विरोधाभासी बताते हुए आपत्ति जताई है।
विरोध स्वरूप कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला पंचायत परिसर में बाबा साहब की प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन किया। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने कहा कि जिस मंच से विभाजनकारी और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया, वहीं संविधान निर्माता की तस्वीर लगाना संविधान की आत्मा के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने देश को समानता, न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की राह दिखाई थी। ऐसे में उनके नाम का उपयोग कर समाज में विभाजन पैदा करने वाली भाषा स्वीकार्य नहीं है।
बसंत कुमार ने मामले में अल्मोड़ा के पुलिस अधीक्षक से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। उनका कहना है कि यदि प्रशासन इस पर कार्रवाई नहीं करता, तो इससे गलत संदेश जाएगा।
पूर्व दर्जा मंत्री राजेंद्र टंगड़िया ने कहा कि संविधान और उसकी मूल भावना की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब का नाम लेने से पहले उनके विचारों और आदर्शों को समझना आवश्यक है। संविधान समाज को जोड़ने का कार्य करता है, न कि विभाजन का; इसलिए समानता और न्याय की भावना को ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।








