गरुड़। पहाड़ों में हेलीसेवा को जहां तेज और सुविधाजनक यात्रा का माध्यम माना जा रहा है, वहीं गरुड़ क्षेत्र में सामने आई एक बड़ी लापरवाही ने इस सेवा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेलाडुंगरी हेलीपैड से देहरादून के लिए रवाना हुए सात यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के बजाय हेलीकॉप्टर हल्द्वानी ले जाया गया, जिससे यात्रियों को पूरे दिन भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह हेलीकॉप्टर हल्द्वानी से उड़ान भरकर मेलाडुंगरी हेलीपैड पहुंचा था। यहां से सात यात्री देहरादून जाने के लिए सवार हुए। लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद हेलीकॉप्टर हल्द्वानी के गोलापार हेलीपैड पर उतर गया। जब यात्रियों को इस गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने मौके पर नाराजगी जताई और स्पष्टीकरण की मांग की।
बताया जा रहा है कि इसके बाद यात्रियों को दोपहर में दोबारा गरुड़ लाया गया और फिर देहरादून के लिए रवाना किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में यात्रियों का कीमती समय बर्बाद हो गया। जहां सामान्यतः यह सफर करीब आधे घंटे में पूरा हो जाता है, वहीं इस लापरवाही के चलते यात्रियों को पूरे दिन इंतजार करना पड़ा। खास बात यह है कि यात्रियों ने इस सेवा के लिए भारी किराया भी अदा किया था, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई।
मामले की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। नायब तहसीलदार भूपाल गिरी और राजस्व उपनिरीक्षक अजय साह मौके पर पहुंचे और हेलीसेवा संचालित करने वाली कंपनी से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब की। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह चूक तकनीकी स्तर पर हुई या संचालन में किसी प्रकार की लापरवाही रही। घटना के बाद स्थानीय लोगों और यात्रियों में आक्रोश देखने को मिला। उन्होंने इस प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए हेलीसेवा में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात कही है। लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीसेवा जीवनरेखा मानी जाती है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल यात्रियों की सुरक्षा बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं।








