बागेश्वर : आजादी के अमृत महोत्सव के तहत वर्ष 2023 के स्वतंत्रता दिवस पर जिले के सभी गांवों में स्वतंत्रता सेनानियों, वीर सैनिकों और शहीदों की स्मृति में शिलापट लगाए जाने थे। लेकिन विभाग की लापरवाही के चलते कई दूरस्थ गांवों में अब, दो वर्ष बाद, ये शिलापट पहुँचना शुरू हुए हैं—वह भी भारी त्रुटियों के साथ।
बगराटी गांव में दो स्वतंत्रता सेनानी ‘शहीद’ लिखे गए
सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले बगराटी गांव पहुँची शिलापट में गांव के दो स्वतंत्रता सेनानियों—पद्म सिंह डसीला और त्रिलोक सिंह डसीला—को गलत तरीके से शहीद दर्शाया गया है।
इस गलती से सेनानियों के परिजन गहरी नाराजगी जता रहे हैं। स्वतंत्रता सेनानियों के पौत्र पंकज डसीला और हरीश डसीला ने इसे गंभीर त्रुटि बताते हुए तुरंत संशोधन की मांग की है।
उन्होंने कहा कि—
“यह केवल एक गलती नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का अनादर है। इतनी बड़ी चूक प्रशासन की संवेदनहीनता दिखाती है।”
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जिले के पंचायत राज अधिकारी का असंवेदनशील जवाब
जब इस गंभीर विषय पर पंचायत राज विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया, तो अधिकारियों ने गलती स्वीकारने के बजाय उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाया।
सूत्रों के अनुसार पंचायत राज अधिकारी ने कहा—
“मामूली सी बात है, 1200–1500 रुपये में सुधार हो जाएगा।”
इस जवाब ने परिजनों और स्थानीय लोगों की नाराजगी को और बढ़ा दिया।
पंकज डसीला ने इसे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान बताते हुए कहा कि सरकारी धन और योजनाओं के प्रति यह लापरवाही असहनीय है।
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उपजिलाधिकारी कांडा ने दिया सुधार का निर्देश
स्थानीय स्तर पर मामला गंभीरता से उठने पर उपजिलाधिकारी कांडा डॉ. ललित मोहन तिवारी ने हस्तक्षेप किया है।
उन्होंने बताया—
“सम्बंधित विभाग को निर्देशित कर दिया गया है कि तत्काल शहीद शब्द हटाकर ‘स्वतंत्रता सेनानी’ का सही अंकन किया जाए और संशोधित शिलापट शीघ्र गांव में स्थापित की जाए।”
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बैठक के बाद हरकत में आया विभाग
हाल ही में जिलाधिकारी के समक्ष हुई उत्तराधिकारी संगठन की बैठक में दूरस्थ गांवों में शिलापट न लगने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। तभी विभाग सक्रिय हुआ और अब जाकर शिलापट गांवों में भेजी जा रही हैं, जिनमें कई स्थानों पर त्रुटियाँ सामने आ रही हैं।
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गांवों में आक्रोश, सम्मान बहाली की मांग
बगराटी गांव सहित कई इलाकों में लोग इसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं।
परिवारों का कहना है कि स्वतंत्रता सेनानियों के नामों और दर्जे में गलती करना उनकी शहादत और संघर्ष का अपमान है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि—
शिलापटों की जिला स्तर पर गंभीरता से जांच हो
गलत सामग्री भेजने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए
सभी गांवों में शिलापट सही जानकारी के साथ समयबद्ध तरीके से स्थापित किए जाएँ








