तीनों ब्लॉकों से पहुंचे 100 से अधिक छात्र-छात्राएं, कबाड़ और स्थानीय संसाधनों से समझे भौतिकी के गूढ़ सिद्धांत
बागेश्वर, संवाददाता:
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) बागेश्वर में आयोजित दो दिवसीय “परिवेशीय संसाधन आधारित अनुभवात्मक भौतिकी कार्यशाला” के दूसरे और अंतिम दिन विज्ञान के प्रति उत्साह और जिज्ञासा का अनूठा संगम देखने को मिला। बागेश्वर, गरुड़ और कपकोट विकासखंडों के विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने विज्ञान के रोचक प्रयोगों, मॉडलों और गतिविधियों के माध्यम से भौतिकी के जटिल सिद्धांतों को सहज ढंग से समझा। इस दौरान देश के विख्यात भौतिक वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और पद्मश्री सम्मानित प्रो. एच. सी. वर्मा के ‘जादुई प्रयोगों’ ने बच्चों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
“Sci-Curate 2026” के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में विज्ञान को किताबों और प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर स्थानीय परिवेश और दैनिक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया गया। विद्यार्थियों ने कबाड़ एवं कम लागत वाली सामग्री से विज्ञान मॉडल तैयार कर बल, ऊर्जा, गति, संतुलन और अन्य भौतिक सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप में समझा। बच्चों ने स्वयं प्रयोग कर विज्ञान के नियमों को अनुभव किया, जिससे उनमें वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा का विकास हुआ।
कार्यशाला के दौरान प्रो. एच. सी. वर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “विज्ञान को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जब बच्चे स्वयं प्रयोग करते हैं, सवाल पूछते हैं और खोज की प्रक्रिया में शामिल होते हैं, तभी वास्तविक अधिगम संभव हो पाता है। विज्ञान को जीवन से जोड़कर सीखना ही उसकी वास्तविक समझ है।”
बच्चों के साथ संवाद और प्रयोगात्मक सत्र के बाद प्रो. वर्मा भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा, “बागेश्वर के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों से आए बच्चों की आँखों में जो चमक, जिज्ञासा और सीखने की ललक मैंने देखी, वही नए भारत के वैज्ञानिक दृष्टिकोण की नींव है। इन बच्चों में अद्भुत वैज्ञानिक प्रतिभा छिपी है, जिसे सही दिशा और अवसर देने की आवश्यकता है।”
डायट बागेश्वर के प्राचार्य चक्षुष्पति अवस्थी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप गतिविधि आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों और शिक्षकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ नवाचार की भावना को भी प्रोत्साहित करती हैं। स्थानीय संसाधनों से विज्ञान को समझाने की यह पहल विद्यालयी शिक्षा को अधिक प्रभावी और रोचक बनाएगी।”
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. भुवन चन्द्र ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को विज्ञान की अवधारणाओं को सरल, रोचक और व्यवहारिक रूप में समझाना है। उन्होंने कहा कि स्थानीय एवं कम लागत की सामग्री से तैयार गतिविधियाँ विद्यालयों में विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी बना सकती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता को कार्यशाला की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।
कार्यशाला में भवानी शंकर कांडपाल (केंद्रीय विद्यालय कौसानी), अनुभव अवस्थी (सोपान आश्रम, कानपुर), विनोद जोशी एवं भुवन मेलकानी ने सुगमकर्ता के रूप में गतिविधि आधारित सत्र संचालित किए। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय, डॉ. के. एस. रावत, डॉ. सी. एम. जोशी, पूजा लोहूमी, डॉ. बी. डी. पाण्डेय, डॉ. संदीप कुमार जोशी, डॉ. दीपा जोशी, डॉ. उर्मिला कन्याल बिष्ट, आलोक पांडेय सहित अन्य शिक्षकों एवं सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने विज्ञान गतिविधियों के प्रति विशेष उत्साह व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने की अपेक्षा जताई।








