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बागेश्वर : ई-फार्मेसी के विरोध में बागेश्वर बंद रहीं दवा दुकानें, नियमों में समानता की मांग तेज

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बागेश्वर। ऑनलाइन दवाओं (ई-फार्मेसी) की अनियंत्रित बिक्री और स्पष्ट गाइडलाइंस के अभाव के विरोध में आज बागेश्वर जिले की सभी दवा दुकानें बंद रहीं। जिलेभर के दवा व्यवसायियों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए ई-फार्मेसी पर समान नियम लागू करने की मांग उठाई। बंद के चलते कई स्थानों पर लोगों को दवा खरीदने में दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। दवा कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के बढ़ते प्रभाव और असमान प्रतिस्पर्धा के कारण जिले के दवा कारोबारियों का व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इससे कारोबार घटने के साथ कई लोगों की नौकरियां भी प्रभावित हुई हैं। फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रकाश जोशी ने कहा कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री में स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी हो रही है, जिससे लोगों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म पर कई बार बिना पर्याप्त जांच के नशीली दवाएं, नींद की गोलियां और अबॉर्शन संबंधी दवाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।
गोकुल जोशी ने कहा कि ऑफलाइन मेडिकल स्टोरों में ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन जांचने, दवा की मात्रा सीमित रखने और मरीज की आवश्यकता के अनुसार दवा देने के नियमों का पालन किया जाता है। एक बार में अधिक मात्रा में दवा नहीं दी जाती और अधिकतम एक महीने का डोज ही दिया जाता है, लेकिन ई-फार्मेसी में ऐसे नियमों का पालन नहीं दिखता है। उन्होंने यह भी कहा कि ई-फार्मेसी के माध्यम से लोग बिना सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ रहा है। साथ ही ऑफलाइन फार्मेसी में दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कोल्ड चेन सिस्टम का पालन किया जाता है, जबकि ऑनलाइन डिलीवरी में इसके टूटने की आशंका रहती है, जिससे दवाओं का प्रभाव कम हो सकता है। दवा व्यवसायियों ने यह भी सवाल उठाया कि जहां ऑफलाइन मेडिकल स्टोर सीमित मार्जिन पर दुकान, स्टाफ और अन्य खर्चों का भार उठाते हैं, वहीं ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म 50 प्रतिशत तक छूट देकर बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहे हैं।फार्मेसिस्ट एसोसिएशन ने मांग की कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों फार्मेसी के लिए नियम एक समान लागू किए जाएं, ताकि स्वास्थ्य सुरक्षा और दवा व्यवसाय दोनों को संतुलित रखा जा सके। इस पर बनाए महेश खेतवाल, भुवन जोशी, नरेंद्र चौहान, डॉ. जेएमएस चौहान, मदन हरड़िया, जीवन गरिया, कैलाश कोरंगा, कौशल मिश्रा, हर्ष मेहरा, तारा करम्याल, धीरज बिष्ट, कमल परिहार एवं पंकज तिवारी।

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