भारतीय सेना के पंचशूल ब्रिगेड के अंतर्गत 12 कुमाऊं बटालियन ने बागेश्वर जिले के पिंडारी और कफनी ग्लेशियर क्षेत्र के लिए 18 से 29 सितंबर तक ट्रैकिंग अभियान चलाया। अभियान का उद्देश्य सैनिकों की शारीरिक क्षमता, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने के साथ चुनौतीपूर्ण पर्वतीय परिस्थितियों में कार्य करने की दक्षता बढ़ाना रहा। अभियान के दौरान सेना का दल निर्धारित ट्रैकिंग मार्ग से आगे बढ़ते हुए बागेश्वर- कपकोट- सौंग- लोहाखेत-धाकुड़ी-खाती होते हुए पिंडारी ग्लेशियर और कफनी ग्लेशियर क्षेत्र तक पहुंचा। कफनी ग्लेशियर को कुमाऊं की शान भी कहा जाता है। सेना के इस अभियान की खास उपलब्धि लंबे समय से बंद पड़े कफनी ग्लेशियर ट्रेक को फिर से खोलना रहा। वर्ष 2013 की आपदा के बाद यह ट्रेक क्षतिग्रस्त हो गया था। बाढ़ में पुल बह गए, रास्ते मलबे में दब गए और ट्रेक के कई हिस्से कफनी नदी में समा गए थे। इसके चलते यह ऐतिहासिक ट्रेकिंग मार्ग एक दशक से अधिक समय से सुरक्षित रूप से बहाल नहीं हो पाया था। 12 कुमाऊं बटालियन के अभियान दल ने इस मार्ग का सफलतापूर्वक सर्वेक्षण कर कफनी ग्लेशियर तक पहुंचने में सफलता हासिल की। सेना के अनुसार इससे इस ऐतिहासिक ट्रेकिंग रूट पर गतिविधियां दोबारा शुरू होने की संभावनाएं बढ़ी हैं। इससे क्षेत्र में साहसिक पर्यटन और प्राकृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ट्रैकिंग के दौरान जवानों को कठिन चढ़ाई, बदलते मौसम और ऊंचाई से जुड़ी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। अभियान के माध्यम से सैनिकों को पर्वतीय वातावरण में सामूहिक समन्वय, सीमित संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और निर्णय क्षमता का व्यावहारिक अनुभव मिला। अभियान दल ने स्थानीय पूर्व सैनिकों से भी मुलाकात की। अभियान के दौरान पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी के प्रति जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया गया। सेना के जवानों ने ट्रैकिंग मार्ग पर स्वच्छता बनाए रखने तथा प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट को पर्वतीय क्षेत्र में नहीं छोड़ने का संदेश भी दिया। 29 सितंबर को पंचशूल ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर गौतम पटानिया ने पिथौरागढ़ में अभियान दल का फ्लैग-इन किया। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए अभियान की सफलता पर बधाई दी। उन्होंने अभियान में शामिल जवानों के प्रयासों की सराहना की।







