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खनन पट्टा मामले में प्रार्थना पत्र खारिज

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बागेश्वर। खनन पट्टे से जुड़े एक मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार तिवारी की अदालत ने प्रार्थी नवीन कुमार द्वारा दायर प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया है। प्रार्थी ने जिला खान अधिकारी, बागेश्वर पर बिना वैधानिक अधिकार के खनन कार्य में हस्तक्षेप, कर्मचारियों को डराने-धमकाने तथा पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे। प्रार्थी की ओर से भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं 351, 130/131, 329, 126, 198, 201, 204, 212 और 217 के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज करने की मांग की गई थी। इसके अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के अंतर्गत संरक्षण आदेश जारी करने की भी प्रार्थना की गई थी। प्रार्थी का कहना था कि उसके पास ग्राम भैरूचौबट्टा क्षेत्र में वैध सोपस्टोन खनन पट्टा है, लेकिन जिला खान अधिकारी ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की गलत व्याख्या करते हुए खनन कार्य में बाधा उत्पन्न की। आरोप लगाया गया कि अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों को भयभीत किया और कार्य रुकवाने का प्रयास किया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने स्पष्ट किया कि खनन पट्टे से संबंधित प्रकरण पहले से ही उच्च न्यायालय में लंबित है। ऐसे में यदि किसी सरकारी अधिकारी द्वारा आदेशों की गलत व्याख्या की गई है, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी उपाय उच्च न्यायालय में चुनौती देना है, न कि सीधे आपराधिक परिवाद दायर करना। अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी करने का अधिकार जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट को है, न कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को। इन सभी तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने विपक्षीगण के विरुद्ध आपराधिक परिवाद दर्ज करने का कोई आधार नहीं पाया और प्रार्थी की याचिका को निरस्त कर दिया।

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