डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्र में होगा निर्माण, लेपर्ड, लंगूर और बंदरों को रखने की मिलेगी सुविधा; जिले की छह रेंजों में गठित हुई क्यूआरटी टीमें
बागेश्वर। जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और वन्यजीवों के बेहतर संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। बागेश्वर के वज्यूला में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 1 करोड़ 60 लाख रुपये की स्वीकृति मिल गई है। करीब डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्र में बनने वाले इस सेंटर में लेपर्ड, लंगूर, बंदर सहित अन्य वन्यजीवों को रखने की व्यवस्था की जाएगी। रेस्क्यू सेंटर बनने से जिले में पकड़े जाने वाले वन्यजीवों को उपचार और देखरेख के लिए दूसरे जिलों में भेजने की जरूरत काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। इससे वन विभाग को भी राहत मिलेगी और रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को स्थानीय स्तर पर ही सुरक्षित रखने की सुविधा उपलब्ध होगी।
प्रभागीय वनाधिकारी प्रकाश आर्या ने बताया कि रेस्क्यू सेंटर की स्वीकृति मिल चुकी है। वज्यूला में इसका निर्माण प्रस्तावित है। सेंटर बनने के बाद वन्यजीवों को रखने के लिए दूसरे जिलों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे रेस्क्यू अभियान को भी गति मिलेगी। वही उन्होंने बताया कि जिले में बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए वन विभाग का अभियान लगातार जारी है। विभाग की टीमें प्रतिदिन बंदरों को पकड़ रही हैं। अब तक जिले में 568 बंदरों को पकड़ा जा चुका है। वन विभाग का कहना है कि बंदरों को पकड़ने का अभियान आगे भी जारी रहेगा। वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं से निपटने के लिए जिले की सभी छह वन रेंजों में क्विक रिस्पांस टीम का गठन कर दिया गया है। प्रत्येक टीम में एक वाहन और पांच कर्मचारी तैनात रहेंगे। इन टीमों को वन्यजीवों से जुड़ी शिकायत मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है। वन विभाग की इस पहल से वन्यजीवों की आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी। रेस्क्यू सेंटर के निर्माण और क्यूआरटी टीमों के गठन से जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में वन विभाग की तैयारियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।







