बागेश्वर। जनपद बागेश्वर के ब्लॉक सभागार में आयोजित पहली बीडीसी बैठक हंगामेदार माहौल में संपन्न हुई। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल बिजली आपूर्ति, पेयजल संकट, जर्जर सड़कों और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को लेकर ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। कई मौकों पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच तीखी नोक-झोंक भी देखने को मिली।
बैठक में जनपद की विभिन्न ग्राम पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का शुभारंभ विधायक पार्वती दास, जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्य, जिला पंचायत उपाध्यक्ष विशाखा खेतवाल, ब्लॉक प्रमुख दीपा देवी एवं मुख्य विकास अधिकारी आर.सी. तिवारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
बैठक के दौरान अधिकांश वक्ताओं ने विकास कार्यों में बाधा के लिए बजट की कमी को जिम्मेदार ठहराए जाने पर नाराजगी जताई। क्षेत्र पंचायत सदस्य गोपाल दत्त भट्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि हर बीडीसी बैठक में वही बात दोहराई जाती है कि बजट नहीं है। यदि बजट ही नहीं है तो फिर बैठकों का क्या औचित्य है? ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं, लेकिन समाधान सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है।
वही ग्राम प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष नवल टम्टा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में समस्याओं की कोई कमी नहीं है। पेयजल संकट, सड़कें और स्वास्थ्य सेवाएं सबसे बड़ी जरूरत हैं। बैठक तभी सफल मानी जाएगी जब उठाए गए मुद्दों पर ठोस कार्यवाही हो। हम उम्मीद करते हैं कि अगली बैठक तक इन समस्याओं पर कुछ न कुछ प्रगति जरूर दिखाई देगी। वही बैठक के दौरान ग्राम प्रधान योगेश जोशी ने प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी बैठक में आते हैं, हमारी बात सुनते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने को तैयार नहीं रहते। अधिकांश विभाग मानो शून्यता में सोए हुए हैं। न सरकार और न ही प्रशासन इस ओर गंभीर नजर आ रहा है, जिसका खामियाजा ग्रामीण जनता भुगत रही है। वही ग्राम प्रधान दीपक खेतवाल ने जंगली जानवरों से खेती को नुकसान हो रहे नुकसान और सिंचाई के बिना खेती को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। उनके इस बयान के बाद सभागार में मौजूद अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी समर्थन में आवाज बुलंद की। बैठक में उपस्थित विभागीय अधिकारियों से जनप्रतिनिधियों ने सीधे सवाल किए और लंबित योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट मांगी। कई मामलों में अधिकारियों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि यदि समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो आने वाली बैठकों में और अधिक कड़ा रुख अपनाया जाएगा। वहीं ब्लॉक प्रमुख दीपा देवी ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि बैठक में जो भी समस्याएं सामने आई हैं, वे जनहित से जुड़ी हैं। सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया गया है और संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएंगे कि प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं का समाधान किया जाए। बैठक में मौजूद विधायक पार्वती दास ने जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीर बताते हुए विभागीय अधिकारियों को जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने के निर्देश दिए। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्य ने भी विकास कार्यों में आपसी समन्वय पर जोर दिया। मुख्य विकास अधिकारी आर.सी. तिवारी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों को विभागीय समीक्षा में शामिल कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। बैठक में ग्रामीण इलाकों में अनियमित बिजली आपूर्ति, गर्मियों में गहराता पेयजल संकट, खस्ताहाल सड़कें, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों में असंतोष और बढ़ सकता है। पहली बीडीसी बैठक में उठा यह जनाक्रोश आने वाले समय में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष विशाखा खेतवाल, ज्येष्ठ प्रमुख मनीष कुमार,हरीश जनौटी,दीपक खेतवाल, शेर सिंह बिष्ट,शिल्पी पंत,संगीता आर्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।








