बागेश्वर: ब्लॉक सभागार में भारतीय स्टेट बैंक के तत्वावधान में आपकी पूंजी, आपका अधिकार विषय पर एक व्यापक वित्तीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य आमजन, विशेषकर ग्रामीणों और महिलाओं को बैंकों में वर्षों से लंबित जमा धनराशि से संबंधित अधिकारों की जानकारी देना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक प्रतिनिधि भास्कर दास, परियोजना निदेशक शिल्पी पंत एवं एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक मिहिर बहादूर सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में एलआईसी, अर्बन बैंक, कूर्मांचल बैंक, यूको बैंक, सहकारिता बैंक, यूनियन बैंक और केनरा बैंक सहित विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यशाला में बताया गया कि बैंक खातों में 10 वर्षों या उससे अधिक समय से जमा फंसी हुई राशि को निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाताधारकों या उनके उत्तराधिकारियों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर कुल 24 लाख 7 हजार 361 रुपये के 28 चेक पात्र लाभार्थियों को वितरित किए गए।
इस दौरान विधायक प्रतिनिधि भास्कर दास ने कहा कि अक्सर जानकारी के अभाव में लोगों की मेहनत की कमाई वर्षों तक बैंकों में पड़ी रहती है। आपकी पूंजी, आपका अधिकार जैसे अभियान आमजन को जागरूक कर उनके हक तक पहुंच सुनिश्चित करते हैं। ऐसे कार्यक्रम गांव-गांव तक पहुंचने चाहिए। साथ ही परियोजना निदेशक शिल्पी पंत ने कहा कि
ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। महिलाओं और किसानों को बैंकिंग प्रक्रियाओं की सही जानकारी मिलने से उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक मिहिर बहादूर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बैंकों में जमा प्रत्येक ग्राहक की पूंजी सुरक्षित है। यदि कोई खाता लंबे समय से निष्क्रिय है तो उसे पुनः सक्रिय कर राशि प्राप्त की जा सकती है। एसबीआई का प्रयास है कि कोई भी व्यक्ति सिर्फ जानकारी के अभाव में अपने धन से वंचित न रहे। कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे ग्रामीणों एवं महिलाओं को बैंकिंग योजनाओं, निष्क्रिय खातों, नामांकन, बीमा, केवाईसी और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की मांग की। इस दौरान डॉ प्रमोद जनपांगी, दीप जोशी, केदार कोरंगा,चंदन सिंह,प्रकाश पांडे,प्रेमा परिहार, काव्या आदि मौजूद थे।








