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निजी स्कूलों ने शिक्षा विभाग के नोटिस पर जताई कड़ी आपत्ति, विधिक कार्रवाई की चेतावनी

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बागेश्वर में प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक 22 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई, जिसमें मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी नोटिस को लेकर उत्पन्न विधिक एवं संवैधानिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में एसोसिएशन ने नोटिस की भाषा को मानहानिकारक बताते हुए बिना सत्यापन उसके प्रसार पर कड़ी आपत्ति जताई। साथ ही विभाग से तत्काल खंडन की मांग की गई और आवश्यकता पड़ने पर मानहानि वाद दायर करने की चेतावनी दी गई। सदस्यों ने यह भी कहा कि अत्यंत कम समय देकर स्पष्टीकरण मांगना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। उन्होंने उत्तर देने के लिए उचित समय-सीमा तय करने की मांग उठाई। बैठक में निजी विद्यालयों की शैक्षणिक स्वायत्तता और पाठ्यपुस्तक चयन में हस्तक्षेप को असंवैधानिक करार दिया गया। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर इस मामले में न्यायालय की शरण ली जाएगी।
शुल्क निर्धारण को लेकर हर वर्ष मार्च-अप्रैल में उठाए जाने वाले सवालों को “Excessive Regulation” बताते हुए पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया। वहीं, बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण को “Due Process” के विरुद्ध बताया गया और इस पर भी आपत्ति जताई गई।
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि प्रवेश सत्र के दौरान निरीक्षण की प्रक्रिया प्रशासनिक उत्पीड़न का रूप ले लेती है। इस संबंध में राज्य स्तर पर ज्ञापन देने का निर्णय भी लिया गया।
बैठक में संवैधानिक अधिकारों जैसे अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 19(1)(g) और अनुच्छेद 21 के संरक्षण हेतु विधिक कार्यवाही की तैयारी पर सहमति बनी। जरूरत पड़ने पर रिट याचिका दायर करने की बात भी कही गई। एसोसिएशन ने कहा कि निजी विद्यालय शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और उनके अधिकारों का संरक्षण आवश्यक है। सरकार से संवाद और पारदर्शिता की अपेक्षा जताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए वे हर संभव कदम उठाएंगे। बैठक में एन बी भट्ट, घनानंद जोशी, मनोज कपिल, जावेद सिद्दकी, रेखा धामी, जगदीश पाठक, दुर्गा असवाल, गौरव पंत, उमेश जोशी, दीवान सिंह खेतवाल, दीपक पाठक, हिमांशु असवाल, मुर्शील सिद्दकी, एसएस विर्क, दीपक लोहनी सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता चंदन परिहार ने की, जबकि संचालन हरीश चंद्र पांडेय द्वारा किया गया।

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