संवैधानिक अधिकार संघर्ष समिति ने सौंपा ज्ञापन, 12 दिनों से धरने पर बैठे प्रभावित ग्रामीणों की समस्या सुलझाने की अपील
बागेश्वर: जिले के भैरूचपट्टा में खनन पट्टे से जुड़े मामले को लेकर प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। हल्द्वानी की संवैधानिक अधिकार संघर्ष समिति ने इस मामले में बागेश्वर के जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है। समिति ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर खनन पट्टे से जुड़े विवाद की निष्पक्ष जांच कराने और प्रभावित ग्रामीणों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की अपील की है।
समिति के संयोजक मुकेश चंद्र बोद्ध की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि अधिवक्ता बसंत कुमार, ऋतु बसंत, नवीन कुमार समेत भैरूचपट्टा के ग्रामीण पिछले करीब 12 दिनों से दिन-रात धरने पर बैठे हैं। समिति का कहना है कि इस मामले का असर केवल खनन पट्टे तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उन ग्रामीणों की रोजी-रोटी भी जुड़ी है, जिनके परिवार खनन कार्य पर निर्भर हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि खनन पट्टे का संचालन रुकने से प्रभावित लोगों के सामने बेरोजगारी और आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा खनन कार्य बंद रहने से सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
समिति ने आरोप लगाया कि खनन पट्टे के मामले में नियमावली के तहत कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। उसने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित पक्षों की बात गंभीरता से सुनने की मांग की है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि खनन पट्टे के संचालन में दस्तावेजों अथवा औपचारिकताओं की कमी है तो नियमानुसार उन्हें पूरा करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए। समिति ने नियमों के दायरे में रहते हुए खनन पट्टे का संचालन दोबारा सुचारु करने की संभावनाओं पर विचार करने का अनुरोध किया है, ताकि ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित न हो और सरकारी राजस्व को भी नुकसान न पहुंचे।
समिति ने जिलाधिकारी से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उसका कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीणों की आजीविका के बीच संतुलन बनाते हुए न्यायसंगत समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे धरना समाप्त कराने की दिशा में भी पहल हो सके।
ज्ञापन पर समिति के पदाधिकारियों और प्रभावित लोगों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि, खनन पट्टे से संबंधित विवाद की वास्तविक स्थिति, प्रशासन का पक्ष और आगे की कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।







