बागेश्वर : 17 दिनों के धरना-प्रदर्शन के बाद आज से आमरण अनशन शुरू, प्रमोद कुमार बैठे आमरण अनशन पर। बागेश्वर जिलाधिकारी कार्यालय के समीप पिछले 17 दिनों से अपनी न्यायसम्मत मांगों को लेकर चल रहा शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आज आमरण अनशन में बदल गया है। लगातार 17 दिनों तक जिला प्रशासन और उत्तराखंड सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आज 02 नवंबर 2026 से प्रमोद कुमार ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि न्यायालय एवं शासन के आदेशों के अनुरूप खनन सामग्री की निकासी हेतु ई-रवन्ना पोर्टल तत्काल खोला जाए तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जिस CTO को निलंबित बताया जा रहा है, उसके निलंबन से संबंधित आदेश, नोटिस एवं अन्य वैधानिक दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्होंने अपने वैध CTO, न्यायालय के आदेश तथा शासन के संबंधित आदेशों सहित सभी आवश्यक दस्तावेज प्रशासन और मीडिया के सामने सार्वजनिक कर दिए हैं। इसके बावजूद 17 दिन बीत जाने पर भी प्रशासन की ओर से न तो कथित CTO निलंबन के दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं और न ही उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट लिखित जवाब दिया गया है। आखिर जिला प्रशासन और उत्तराखंड सरकार के पास इन सवालों का क्या जवाब है? यदि प्रशासन की कार्रवाई कानून के अनुसार है तो उसका कानूनी आधार और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है? क्या 17 दिनों से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे लोगों से संवाद करना भी प्रशासन जरूरी नहीं समझता? आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्याय, पारदर्शिता और कानूनसम्मत अधिकारों के लिए है। उन्होंने जिला प्रशासन और उत्तराखंड सरकार से तत्काल संवाद स्थापित करने, ई-रवन्ना पोर्टल खोलने तथा कथित CTO निलंबन के दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी न्यायसम्मत मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।







