बागेश्वर। जनपद मुख्यालय स्थित गोमती नदी में हो रहा अवैध खनन एक गंभीर पर्यावरणीय संकट बनता जा रहा है। यह आरोप कांग्रेस कमेटी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष भगवत सिंह डसीला ने लगाते हुए कहा कि यह समस्या केवल स्थानीय स्तर की नहीं, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी के लिए बड़ा खतरा है। डसीला ने कहा कि गोमती नदी, जो बाबा बागनाथ मंदिर के सामने अदृश्य गंगा–सरस्वती से मिलकर त्रिवेणी संगम के रूप में जानी जाती है और आगे चलकर पंचेश्वर में काली नदी में विलय होकर बनबसा में शारदा के नाम से प्रवाहित होती है, हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अहम हिस्सा है। बावजूद इसके नदी गांव की ओर सड़क निर्माण की आड़ में खुलेआम अवैध खनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नदी के बीचों-बीच पोकलैंड जैसी भारी मशीनों से बड़े-बड़े बोल्डर निकाले जा रहे हैं और रेत-बजरी का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है। पुलों के समीप 50 से 100 मीटर की दूरी तक भी खनन जारी होना नियमों का खुला उल्लंघन है, जबकि आम लोगों को अपने आवास निर्माण के लिए भी नदी से सामग्री निकालने की अनुमति नहीं दी जाती। डसीला ने बताया कि हालिया रिपोर्टों के अनुसार जनपद में 160 से अधिक खनन इकाइयों के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं, फिर भी अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। इससे नदी का तल खोखला हो रहा है, जलस्तर गिर रहा है और भविष्य में बाढ़, भूस्खलन व पुलों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन से जलीय जीवों, मछलियों और जल स्रोतों को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। इसके साथ ही सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि खनन माफिया फल-फूल रहा है। डसीला ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन, तहसील प्रशासन, वन विभाग, पुलिस प्रशासन और संबंधित एजेंसियां इस ओर आंख मूंदे हुए हैं। सड़क निर्माण कार्य को लेकर भी डसीला ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्य सड़क मार्ग पर स्थायी गेट लगाकर रास्ता बंद किया गया है, जिससे संदेह पैदा होता है कि निर्माण पूर्ण होने के बाद यह मार्ग आम जनता के लिए खुला रहेगा या नहीं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यह सड़क आगे द्यांगण–थुनाई बाइपास पुल तक विस्तारित की जाएगी या फिर इसका लाभ किसी विशेष वर्ग तक सीमित रहेगा। निवर्तमान जिलाध्यक्ष भगवत सिंह डसीला ने कहा कि देवभूमि की नदियां हमारी संस्कृति और अस्तित्व का आधार हैं। यदि समय रहते अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले वर्षों में गोमती नदी जैसी पवित्र नदियां इतिहास बन सकती हैं। उन्होंने प्रशासन और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।








