यूटीईटी प्रमाण-पत्रों के सत्यापन में सामने आई गड़बड़ी, नोटिस जारी कर विभाग ने मांगा जवाब
बागेश्वर। जिले के प्राथमिक विद्यालयों में नवनियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर की मूल सारणी से जांच और मिलान के बाद चार शिक्षकों के यूटीईटी प्रमाण-पत्र कूटरचित पाए गए हैं। इसके बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इनमें दो शिक्षक कपकोट ब्लॉक और दो शिक्षक बागेश्वर ब्लॉक से संबंधित बताए गए हैं। प्रमाण-पत्रों की जांच के दौरान अंकपत्र और मूल अभिलेखों में अंतर मिलने पर मामला संदिग्ध हुआ।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बागेश्वर ब्लॉक के पंकज कुमार के यूटीईटी-I (2024) के अनुक्रमांक और परिषद की मूल सारणी में विवरण का मिलान नहीं हुआ। परिषद ने संबंधित प्रमाण-पत्र को कूटरचित और फर्जी करार दिया है। इसी तरह नेहा के यूटीईटी-I (2024) के अंकपत्र में भी गंभीर विसंगति मिली। मूल पंजिका के अनुसार उनके अंक 53/150 थे, जबकि जमा किए गए अंकपत्र में अधिक अंक दर्शाए जाने की बात सामने आई है। वही कपकोट ब्लाक के चंद्र प्रकाश आर्य के पुत्र सादी राम आर्य के यूटीईटी-I (2024) के अंकपत्र में भी फर्जीवाड़ा पाया गया। मूल पंजिका के अनुसार उनके कुल अंक 61/150 थे। इसके अलावा प्रियंका के प्रमाण-पत्र में भी अनियमितता मिलने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। वही बता दे कि इससे पहले कपकोट ब्लॉक में अरविंद कुमार, संजय कुमार, रजनी, लक्ष्मी आर्या और रोहित कुमार के प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए थे। शिक्षा विभाग की ओर से संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत अंकपत्र-सह-प्रमाणपत्र कूटरचित पाए गए हैं और इन्हें बोर्ड द्वारा जारी नहीं किया गया था। मामले ने जिले में नवनियुक्त शिक्षकों के दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया और भर्ती में संभावित फर्जीवाड़े को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने के पीछे कौन लोग शामिल हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।








