बागेश्वर : जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), बागेश्वर में जिला संदर्भ समूह (विज्ञान) के शिक्षकों के लिए चार दिवसीय “अनुभव आधारित विज्ञान कार्यशाला” का शुभारंभ उत्साहपूर्ण एवं शैक्षिक वातावरण में हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी, गतिविधि-आधारित, प्रयोगात्मक एवं अनुभवपरक बनाते हुए शिक्षकों की वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार तथा कक्षा-कक्ष में कम लागत वाली शिक्षण-अधिगम सामग्री के उपयोग की क्षमता को विकसित करना है।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. दीपक कुमार, सहायक प्राध्यापक, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कपकोट, बागेश्वर रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. के. एस. रावत, प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, बागेश्वर ने की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भुवन चंद्र, कार्यक्रम समन्वयक द्वारा किया गया। कार्यशाला में प्रधानाचार्य पंकज शाह, राजकीय इंटर कॉलेज गागरीगोल सहित जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए लगभग 40 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
मुख्य अतिथि डॉ. दीपक कुमार ने कहा कि विज्ञान केवल तथ्यों एवं परिभाषाओं को याद करने का विषय नहीं, बल्कि देखने, प्रश्न पूछने, प्रयोग करने, तर्क करने और निष्कर्ष तक पहुँचने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थियों को विज्ञान के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराना है तो कक्षा-कक्ष में अनुभव आधारित एवं गतिविधि आधारित शिक्षण को प्राथमिकता देनी होगी।
उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे स्थानीय परिवेश, उपलब्ध संसाधनों तथा दैनिक जीवन की घटनाओं को विज्ञान शिक्षण से जोड़ें। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधन विज्ञान शिक्षण में बाधा नहीं हैं, बल्कि शिक्षक की रचनात्मकता और नवाचार से सामान्य एवं अनुपयोगी दिखाई देने वाली वस्तुओं को भी प्रभावी विज्ञान शिक्षण सामग्री में बदला जा सकता है। उन्होंने जिला संदर्भ समूह के शिक्षकों को अपने-अपने विद्यालयों में नवाचार के वाहक के रूप में कार्य करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. के. एस. रावत ने कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान शिक्षण की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, समस्या समाधान, रचनात्मकता तथा तार्किक चिंतन विकसित करना विज्ञान शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जिला संदर्भ समूह के शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में अन्य शिक्षकों के लिए शैक्षणिक नेतृत्व प्रदान करेंगे। इसलिए इस प्रकार की कार्यशालाओं में प्राप्त अनुभवों को विद्यालय स्तर तक पहुँचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चार दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभागी शिक्षक स्वयं गतिविधियों को करके, उनके पीछे छिपी वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझकर तथा उनके शैक्षिक उपयोग पर चर्चा करके अधिक प्रभावी विज्ञान शिक्षण की दिशा में कार्य करेंगे। प्रशिक्षण के उपरांत प्रतिभागी शिक्षक इन अनुभवों को अपने विद्यालयों में लागू करते हुए विद्यार्थियों के लिए विज्ञान शिक्षण को अधिक रोचक, जीवंत, प्रयोगात्मक और जिज्ञासापूर्ण बनाएँगे।
प्राचार्य ने कार्यशाला के आयोजन के लिए कार्यक्रम समन्वयक एवं सभी संदर्भदाताओं तथा संस्थान के सहयोगी सदस्यों को शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. भुवन चंद्र ने बताया कि चार दिवसीय कार्यशाला को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि शिक्षक केवल व्याख्यान सुनने तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं गतिविधियों एवं प्रयोगों में सक्रिय रूप से प्रतिभाग करें। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का केंद्रीय विचार “करके सीखना, अनुभव से समझना और विद्यालय में लागू करना” है।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला के दौरान विज्ञान की विभिन्न अवधारणाओं को सरल, रोचक एवं स्थानीय संसाधनों के माध्यम से समझने के साथ-साथ गतिविधि निर्माण, प्रयोगात्मक शिक्षण, कम लागत वाली विज्ञान सामग्री, प्रश्न आधारित अधिगम, समस्या समाधान एवं विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने जैसे विषयों पर कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिला संदर्भ समूह के शिक्षक आगे चलकर जिले के अन्य विज्ञान शिक्षकों को भी इन गतिविधियों एवं शिक्षण रणनीतियों से परिचित कराएँगे। इस प्रकार कार्यशाला का प्रभाव जिला स्तर पर व्यापक रूप से विद्यालयों तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यशाला में प्रथम फाउंडेशन की ओर से विनोद उप्रेती, कमलेश जोशी, आशीष, गौरव एवं हरीश द्वारा संदर्भदाता के रूप में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया जा रहा है। संदर्भदाताओं द्वारा गतिविधि आधारित विज्ञान शिक्षण, प्रयोगात्मक कार्य, नवाचार एवं सरल संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर शिक्षकों के साथ व्यावहारिक सत्र संचालित किए जा रहे हैं।
कार्यशाला के सफल आयोजन में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, बागेश्वर के डॉ. सी. एम. जोशी, डॉ. उर्मिला बिष्ट कन्याल, डॉ. बी. डी. पांडे, पूजा लोहुमी, डॉ. संदीप कुमार जोशी, डॉ. दयासागर एवं डॉ. रुचि पाठक सहित संस्थान के अन्य सदस्यों द्वारा सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
कार्यशाला में प्रतिभागी शिक्षक विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों एवं प्रयोगों को स्वयं करके उनके शैक्षिक महत्व को समझ रहे हैं। गतिविधियों के दौरान शिक्षकों द्वारा प्रश्न पूछने, परिकल्पना बनाने, प्रयोग करने, अवलोकन करने, परिणामों की व्याख्या करने तथा निष्कर्ष निकालने की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया जा रहा है।








