बागेश्वर। जनपद में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं के बीच वन विभाग लगातार सतर्क नजर आ रहा है। विभाग ने विभिन्न क्षेत्रों में लगी जंगल की आग पर त्वरित कार्रवाई करते हुए नियंत्रण पाया है और स्थानीय लोगों को पर्यावरण संरक्षण एवं वनाग्नि रोकथाम के प्रति जागरूक किया है।
वन विभाग ने कहा कि बागेश्वर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी संस्कृति और धार्मिक आस्था के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के बीच विशेष पहचान रखता है। कौसानी को महात्मा गांधी ने ‘भारत का स्विट्जरलैंड’ कहा था, जबकि पिंडारी ग्लेशियर जैसे पर्यटन स्थल हर वर्ष हजारों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। ऐसे में जंगलों में लगने वाली आग प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
वन विभाग के अनुसार मेलाडूंगरी वन पंचायत क्षेत्र के कोटफुलवारी से झालामाली की ओर भीषण वनाग्नि की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही वन क्षेत्र बैजनाथ की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। आग बुझाने के बाद विभागीय टीम ने ग्रामीणों को वनाग्नि से होने वाले नुकसान और बहुमूल्य वन संपदा के संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
इसके अतिरिक्त पौड़ी बैंड, तोफाड़, लोहारड़ी और रोसयांगा क्षेत्रों में भी आग लगने की सूचनाएं मिलने पर वन विभाग की टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आग को फैलने से रोका और समय रहते नियंत्रण स्थापित किया।
वन विभाग ने क्षेत्रीय लोगों से अपील की है कि जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए सतर्क रहें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। विभाग ने जनसंपर्क अभियान, जागरूकता बैठकों और गोष्ठियों के माध्यम से लोगों से जंगलों में आग न लगाने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल विभाग को देने का आग्रह किया है।
विभाग ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण बेहद जरूरी है और इसमें जनसहयोग की अहम भूमिका है।








