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जंगली सूअरों के आतंक से किसान की मेहनत पर फिरा पानी

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गरुड़,
ग्राम सभा मजकोट (तोक कुन्झाली) में जंगली सूअरों के बढ़ते आतंक ने स्थानीय किसानों की नींद उड़ा दी है। बागवानी और सब्जी उत्पादन के जरिए मिसाल कायम करने वाले प्रगतिशील किसान कैलाश गिरी की फसलों को जंगली सूअरों ने भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे उनकी महीनों की मेहनत और आजीविका संकट में पड़ गई है।
कैलाश गिरी खेती और बागवानी के बल पर हर महीने ₹50,000 से अधिक की सब्जियों का उत्पादन कर रहे थे। उनकी उगाई सब्जियां मजकोट और आसपास के इलाकों के अलावा ग्वालदम तक बेची जाती हैं। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रहे जंगली सूअरों के हमलों ने उनकी आर्थिक स्थिति और मनोबल दोनों को चोट पहुंचाई है। पीड़ित किसान कैलाश गिरी ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय सुरक्षा और मनोबल बनाए रखने के लिए जंगली जानवरों से स्थायी निजात, फसलों की सुरक्षा और हुए नुकसान का उचित मुआवजा देना बेहद जरूरी है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि जब किसान मजबूत होगा, तभी क्षेत्र का विकास संभव है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस दिशा में जल्द से जल्द ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
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– प्रभावित किसान को अपने नुकसान का आंकलन राजस्व विभाग से करवा कर वन विभाग में एक आवेदन देना होगा। तब मुआवजे की प्रक्रिया शुरू होंगी। सरकार ने जंगली सुवर के आखेट के लिए शासनादेश बनाया है। किसी के खेत में फ़सल क्षति को रोकने के लिए लाइसेंस धारी द्वारा लाइसेंस बंदक से आखेट किया जा सकता है। वन विभाग के स्टाफ से अनुमति आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
– महेंद्र गुंसाई, वन क्षेत्राधिकारी।

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