बागेश्वर: लोक संस्कृति और अटूट आस्था के प्रतीक सातूं-आठूं पर्व के अवसर पर नदीगांव स्थित प्रसिद्ध सैम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। मेले और पूजा-अर्चना को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान सैम देव महाराज के दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना की। बी ए दे कि कुमाऊँ की समृद्ध लोक परंपरा के अनुसार, इस अवसर पर महिलाओं ने विधि-विधान से गांस का रोपण कर और कपड़ों व तिनकों से मां गौरा तथा भगवान शिव की अत्यंत सुंदर मूर्तियां बनाईं। सैम मंदिर परिसर में इन देव प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना के लिए मंदिर में महिलाओं की लंबी कतारें लगी रहीं। महिलाओं ने पारंपरिक वस्त्र-आभूषणों में सज-धजकर मां गौरा-महेश की पूजा की और परिवार की खुशहाली व संतान की दीर्घायु का आशीर्वाद मांगा। बता दे कि सातु-आठू पर्व पर विशेष रूप से पूजे जाने वाले ‘बिरुड़ा’ को भगवान को अर्पित किया गया। महिलाओं ने एक-दूसरे को ‘डोर’ और ‘दूब’ बांधकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान महिलाओं द्वारा पारंपरिक ‘झोड़ा-चांचरी’ और लोकगीत गाए गए, जिससे पूरा मंदिर परिसर देवभूमि के पारंपरिक लोक रंगों से सराबोर हो उठा। स्थानीय मान्यता है कि सैम देव महाराज क्षेत्र के रक्षक देवता हैं। सातु-आठू के इस पावन अवसर पर मंदिर में विशेष आरती और पूजा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने सैम मंदिर में शीश नवाकर क्षेत्र में शांति, समृद्धि और अच्छी फसल की मन्नत मांगी। दिनभर चले इस धार्मिक अनुष्ठान और मेले में नदीगांव समेत आसपास के दर्जनों गांवों से पहुंचे हजारों लोगों ने भागीदारी की।








