गरुड़/बागेश्वर। विकासखंड गरुड़ के छटिया और स्याली गांव के बीच बहने वाली घांघली नदी पर पैदल पुल नहीं होने से स्कूली बच्चों समेत ग्रामीणों की आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई है। ग्रामीण पिछले 25-30 वर्षों से नदी पर पैदल पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी है।
घांघली नदी पर पुल नहीं होने के कारण क्षेत्र के पांच से छह गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। स्कूली बच्चे इसी रास्ते से विद्यालय जाते हैं, जबकि महिलाएं खेती-बाड़ी और ग्रामीण रोजमर्रा के कामों के लिए नदी पार करते हैं। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। कई बार बच्चों को नदी का रौद्र रूप देखकर करीब तीन किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर विद्यालय जाना पड़ता है।
बच्चों ने बताया डरावना है नदी पार करना
स्कूली बच्चों का कहना है कि नदी पार करके स्कूल जाना काफी डरावना होता है। हर दिन इसी तरह नदी पार करनी पड़ती है। बच्चों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पैदल पुल का निर्माण कराने की मांग की है, ताकि उन्हें सुरक्षित रास्ता मिल सके।
क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रमोद जोशी ने कहा कि पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार आवाज उठाई जा चुकी है। ग्रामीण करीब 25-30 वर्षों से पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि जल्द आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई तो वह स्वयं धरना-प्रदर्शन करेंगे।
ग्राम प्रधान स्याली चंदन फर्स्वाण ने कहा कि नदी पार करते समय कई बार स्कूली बच्चे गिरकर चोटिल हो चुके हैं। इससे ग्रामीणों में भय बना हुआ है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि विधानसभा चुनाव से पहले पुल निर्माण को लेकर आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। साथ ही ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी भी दी है।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन बरसात के दौरान बच्चों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को देखते हुए घांघली नदी पर जल्द से जल्द पैदल पुल का निर्माण कराए, ताकि वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सके।







