बागेश्वर। जिला अस्पताल के समीप स्थित ऐतिहासिक श्रीनौला धारा का पानी अब इंसानों के पीने योग्य नहीं रह गया है। कभी आधे नगर की प्यास बुझाने वाले इस प्रमुख प्राकृतिक जल स्रोत के पानी की जांच जब जल संस्थान ने एनएबीएल अधिकृत लैब में कराई, तो उसका नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरा। पानी असुरक्षित पाए जाने के बाद नगर पालिका ने तत्काल कदम उठाते हुए धारे के पास चेतावनी बोर्ड लगा दिया है और लोगों को इसका सेवन न करने की सख्त सलाह दी है।
श्रीनौला धारा हमेशा से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ जिला अस्पताल आने वाले हजारों तीमारदारों के लिए पेयजल का मुख्य सहारा रहा है। विशेष रूप से भीषण गर्मियों के दौरान यहाँ सुबह से शाम तक पानी भरने वालों की लंबी कतारें लगी रहती थीं। दूर-दराज के गांवों से अस्पताल में मरीजों की तीमारदारी करने आने वाले लोग इसी धारे के पानी पर पूरी तरह निर्भर रहते थे।
जांच रिपोर्ट में पानी के फेल होने की खबर फैलते ही पूरे शहर में हड़कंप मच गया है और आधे नगर के लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सबसे अधिक असर अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ेगा, जिन्हें अब पीने के शुद्ध पानी के लिए भटकना पड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द धारे के पानी के दूषित होने के कारणों का पता लगाने और अस्पताल परिसर के आसपास वैकल्पिक व शुद्ध पेयजल की पुख्ता व्यवस्था करने की गुहार लगाई है।








