कपकोट। बरसात के दिनों में उफनाई रामगंगा नदी को पार करना कपकोट क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों के लिए आज भी जोखिम भरा बना हुआ है। नाचनी के समीप रामगंगा नदी पर स्थायी पुल नहीं होने से भकूना, नामती, चेताबगड़, पगर, कुसरी समेत आसपास के कई गांवों के लोग ट्रॉली के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। रोजाना स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, मरीज और किसान जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं।
लगातार बारिश से नदी उफान पर है, जिससे ट्रॉली से सफर और भी खतरनाक हो गया है। इसके बावजूद ग्रामीणों के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं है। रविवार को पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण भी ट्रॉली के जरिए नदी पार कर क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 की आपदा में यहां का झूला पुल बह गया था, लेकिन नौ वर्ष बीतने के बाद भी नया पुल नहीं बन सका। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के पैतृक गांव के लिए पुल का निर्माण कराया, लेकिन हजारों ग्रामीणों की सुविधा के लिए इस स्थान पर अब तक स्थायी पुल नहीं बनाया गया।
पूर्व विधायक ने कहा कि पुल नहीं होने से बरसात के मौसम में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है। उन्होंने सरकार से शीघ्र पुल निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अर्जुन भट्ट ने कहा कि ट्रॉली चलाने के लिए जंग लगे लोहे के तार को खींचने से आधे से अधिक ग्रामीणों के हाथ घायल हो चुके हैं। इसके बावजूद मजबूरी में लोगों को इसी रास्ते का उपयोग करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इन गांवों के लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों का सबसे नजदीकी केंद्र पिथौरागढ़ जिले का नाचनी बाजार है, जहां पहुंचने के लिए यही एकमात्र रास्ता है। वही लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ऋषि राज वर्मा ने बताया कि पुल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) लायन कंसल्टेंट द्वारा तैयार की जा रही है। 23.38 करोड़ रुपये की प्रारंभिक डीपीआर विभाग को प्राप्त हो चुकी है, जिसे प्रूफ चेकिंग के लिए भेजा जाएगा। अंतिम डीपीआर अगस्त 2026 तक मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पुल निर्माण के लिए प्रभावित सरकारी और निजी भूमि के अधिग्रहण सहित अन्य औपचारिकताएं सितंबर 2026 तक पूरी होने की संभावना है। पुल का निर्माण विश्व बैंक पोषित यू-प्रिपेयर परियोजना के तहत प्रस्तावित है।








