बागेश्वर। कपकोट विधानसभा क्षेत्र में आपदा के एक साल बाद भी कई गांवों के लोगों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है। कनलगढ़ क्षेत्र के मुसलसेरा नान, चचई, कन्यालीकोट समेत आसपास के गांवों से राजकीय इंटर कॉलेज कन्यालीकोट आने-जाने वाला पैदल मार्ग और पुलिया क्षतिग्रस्त होने के कारण छात्र-छात्राएं और अभिभावक लकड़ी के अस्थायी कठपुल के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं।
पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने मामले को लेकर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के प्रति नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि आपदा के एक साल बाद भी प्रभावित क्षेत्र में लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए जोखिम उठाना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है, जिन्हें प्रतिदिन इसी असुरक्षित रास्ते से विद्यालय पहुंचना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार जानवरों को भी लकड़ी के कठपुल से ही नदी पार कराना पड़ रहा है, जिससे कभी भी हादसा होने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से रास्ते और पुलिया के निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
पूर्व विधायक ने अपने साथ जिला पंचायत सदस्य बलवंत राम, रणजीत कोहली, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य दीवान सिंह, ग्राम प्रधान दीवान राम, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य हीरा सिंह गढ़िया, कैप्टन धाम सिंह गढ़िया और कुंदन गोस्वामी के साथ जिलाधिकारी बागेश्वर को भी समस्या से अवगत कराया है। इसके बावजूद अभी तक कोई ठोस राहत नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई।
उन्होंने जिला प्रशासन से क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग और पुलिया का जल्द निर्माण कराने की मांग की है, ताकि स्कूली बच्चों समेत ग्रामीणों को जोखिम भरी आवाजाही से निजात मिल सके।








