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फर्जी प्रमाणपत्रों से बन गए शिक्षक, जांच में पांच के प्रमाणपत्र निकले फर्जी

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बागेश्वर। कपकोट ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालयों में तैनात पांच शिक्षकों के शैक्षिक एवं अर्हता प्रमाणपत्र जांच में फर्जी पाए गए हैं। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से कराए गए अभिलेखों के मिलान के बाद संबंधित शिक्षकों के प्रमाणपत्र और अंकपत्र कूटरचित पाए जाने का मामला सामने आया है। सभी पांचों प्रमाणपत्र वर्ष 2024 की डीएलएड (प्रथम) परीक्षा से संबंधित बताए गए हैं।

प्राथमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के शैक्षिक और अर्हता प्रमाणपत्रों के नियमित सत्यापन के दौरान मामला सामने आया। शिक्षा विभाग की ओर से पांचों शिक्षकों के डीएलएड प्रमाणपत्रों की छायाप्रतियां सत्यापन के लिए उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर भेजी गई थीं। परिषद के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की ओर से 10 अगस्त को जारी जांच आख्या में बताया गया कि वर्ष 2024 के डीएलएड प्रथम से संबंधित इन अभ्यर्थियों के रोल नंबर और नाम बोर्ड के अभिलेखों में कोई रिकॉर्ड नहीं पाए गए।

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इन पांच शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी

जांच में अरविंद कुमार (अनुक्रमांक 1242351885), संजय कुमार (अनुक्रमांक 1243012741), रजनी (अनुक्रमांक 1242301755), लक्ष्मी आर्या (अनुक्रमांक 1242622358) और रोहित कुमार (अनुक्रमांक 1242351918) के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। परिषद की जांच के अनुसार संबंधित अभ्यर्थियों के डीएलएड प्रथम के अंकपत्र और प्रमाणपत्र परिषद की ओर से जारी ही नहीं किए गए हैं।

जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अभ्यर्थियों के रोल नंबर और नाम बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं। ऐसे में प्रमाणपत्रों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिषद ने अपनी जांच रिपोर्ट प्राथमिक शिक्षा विभाग कपकोट को भेजी है, जिसके आधार पर अब संबंधित शिक्षकों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

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नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

फर्जी प्रमाणपत्रों के सामने आने के बाद अब शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है। मामले में यह जांच का विषय होगा कि संबंधित प्रमाणपत्रों का सत्यापन नियुक्ति के दौरान किस स्तर पर और कैसे किया गया। यदि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने की पुष्टि होती है तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ नियुक्ति निरस्त करने, वेतन की रिकवरी और धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।

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शिक्षा विभाग अब परिषद से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित शिक्षकों के अभिलेखों और नियुक्ति प्रक्रिया की भी जांच कर सकता है। मामले में विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के सचिव विनोद कुमार, हौड़ियाल की ओर से भेजी गई जांच रिपोर्ट में भी संबंधित अभ्यर्थियों के रोल नंबर और नाम बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं पाए जाने तथा डीएलएड प्रथम के अंकपत्र एवं प्रमाणपत्र परिषद की ओर से जारी नहीं किए जाने की पुष्टि की गई है।

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