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जोशीमठ में भू- धसाव दे रहा है तबाही को दस्तक

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प्रकृति जब अपने रौद्र रूप में आती है उससे पार पाना असंभव ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी होता है ऐसा ही कुछ देखने को मिला है चमोली के जोशीमठ नगर में यहां भू-धसाव से तंग आकर लोग घर से बे-घर होने को मजबूर हैं। भू धसाव का दायरा बढ़ता जा रहा हैं, कई घरों पर बड़ी बड़ी दरारें आ चुकी है। स्थानिय लोग अपने घरों को छोड़कर किसी सुरक्षित स्थानों की तलाश में दर दर भटक रहे है. सर्दी का मौसम और भू-धसाव से मकानों का ढहने का ख़तरा जोशीमठ के लोगो के लिये बड़ी आफ़त बनी हुई हैं।

उत्तराखंड के जोशीमठ में भू-धंसाव से लोगों को चौतरफा खतरे का सामना करना पड़ रहा है । घरों और खेतों में दरारें आने के साथ ही अब बिजली के हाईटेंशन लाइन के खंभे तिरछे हो गए है ।
आपको बता दे कि उत्तराखंड के जोशीमठ में पिछले साल नवंबर में जमीन धंसने से घरों में दरारें आने की घटनाएं सामने आई थीं । अब इस जगह पर धरती फाड़कर जगह-जगह से पानी निकलने लगा है ।

जानकारी के मुताबिक जोशीमठ के मारवाड़ी में पिछले कई महीनों से भूस्खलन की घटनाएं हो रही थीं । जिसके बाद अचानक बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग-58 से लगे जयप्रकाश पावर प्रोजेक्ट की कॉलोनी के अंदर से पानी दीवारों के अंदर से और जमीन के अंदर से फूटकर निकलने लगा । मामले की जानकारी होने के बाद प्रशासन की टीम पहुंची और मामले को संज्ञान में लिया । प्रशासन ने 16 परिवारों को नगरपालिका प्राथमिक विद्यालय और अन्य जगह पर शिफ्ट कर दिया है। उत्तराखंड स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने किया था, उसमें कहा था कि घरों में आ रही दरारें शहर की कमजोर बुनियाद के कारण आ रही हैं । इसके अलावा तमाम कारण उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इंगित किए थे । इसमें कंस्ट्रक्शन, शहर की कैपेसिटी और नदी के कारण होने वाला कटाव शामिल है।


वहीं इस मामले में स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां बनने वाली तपोवन विष्णुगढ़ जल विद्युत परियोजना की टनल यानी सुरंग के कारण जोशीमठ में जमीन धंस रही है। स्थानीय लोग सुरक्षा के साथ विस्थापन की मांग कर रहे हैं।

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