चंपावत छात्र संघ ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर धरना प्रदर्शन किया। छात्रसंघ अध्यक्ष मनीष महर ने बताया कि कुछ दिन पूर्व एक महिला के पैर में गंभीर चोट लग गई थी जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया अस्पताल के डॉक्टरों ने बिना महिला का परीक्षण एक्स-रे किए पैर में टांके लगा दिए और महिला को घर भेज दिया। घर पहुंचते ही महिला के पैर में गंभीर दर्द उठने लगा और पैर में और शूजन भी बढ़ गई। अगले दिन फिर महिला को अस्पताल लाया गया लेकिन फिर भी डॉक्टरों ने उनका अच्छी तरह परीक्षण नहीं किया। बाद में महिला को इलाज के लिए निजी अस्पताल ले जाया गया जहां ऑपरेशन से पैर में गड़े 2 इंच लंबे लकड़ी के टुकड़े को बाहर निकाला गया।
इस दौरान 3 घंटे तक जिला अस्पताल में सभी डॉक्टर ओपीडी छोड़कर पीएमएस एचएस ऐरी के कक्ष में बैठ गए। इस दौरान मरीज इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे।
मामले की जानकारी मिलते ही कोतवाल योगेश उपाध्याय, उपनिरीक्षक पिंकी धामी, ललित पांडे छात्रों को समझाने के लिए पहुंचे इस बीच छात्रों और पीएमएस डॉक्टर एचएस ऐरी के बीच वार्ता हुई जिसमें छात्रों द्वारा महिला के साथ हुई लापरवाही की पूरी जानकारी दी इस दौरान छात्रों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के कुछ डॉक्टर निजी अस्पताल में भी प्रैक्टिस करते हैं, जिला अस्पताल में इसलिए वह लापरवाही बरत रहे हैं।
कुछ देर बाद एसडीएम सदर रिंकू बिष्ट भी मौके पर पहुंच गई और मामले की जांच को लेकर लिखित आश्वासन देने के बाद छात्रों ने धरना प्रदर्शन समाप्त किया।




