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रिप ग्रामीण उत्पादों को उपलब्ध करा रहा है बाजार, 556 परिवारों को हो रहा है लाभ

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जिले में ग्रामीण उत्पादों को आज तक सही बाजार उपलब्ध नहीं हो पाया है। सरकारो के द्वारा लाख कोसिसो के बाद भी ग्रामीण उत्पादों को बाजार उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। लेकिन उत्पादकों की इस परेशानी को दूर करने का काम कर रही है (रिप) ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना। परियोजना के माध्यम से स्वयं सहायता समूह से जुड़े उद्यमियों के उत्पादों को आउटलेट के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

रीप परियोजना अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास निधि से पोषित है। योजना का उद्देश्य पूर्व में आजीविका मिशन के तहत गठित प्रदेश के 60,000 समूहों और 601 आजीविका संघ/कलस्टर स्तरीय फेडरेशन के माध्यम से 5,60,000 ग्रामीण परिवारों की ग्रामीण उद्यम आधारित आजीविका में बढ़ोत्तरी करना है। बागेश्वर जिले में 73 स्वयं सहायता समूह, 11 ग्राम संगठन और आठ ग्राम पंचायतों के 556 परिवार योजना में शामिल हैं। परियोजना के माध्यम से ऊर्जा सीएलएफ के तहत आउटलेट लगाकर मौसमी सब्जी, सभी प्रकार के अचार, हस्त शिल्प के उत्पाद, किवी के बने जूस, जैम, जैली, चटनी व अन्य उत्पाद, मडुवा, झिंगोरा समेत सभी श्री अन्न की बिक्री की जा रही है।

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सोमावर को डीएम कार्यालय और बैजनाथ, बुधवार को एसपी कार्यालय, बृहस्पतिवार को गरुड़ के आपुण बाजार और शुक्रवार को विकास भवन में आउटलेट लगाया जाएगा। हालांकि विकास भवन में रोजाना भी आउटलेट लगा रहेगा, लेकिन ताजी सब्जियां शुक्रवार को ही आएंगी। वहीं स्थानीय स्तर पर होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी आउटलेट लगाए जाएंगे।

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रीप परियोजना के उद्देश्यों को पूरा करते हुए स्थानीय उत्पादों को विभिन्न स्थानों पर आउटलेट लगाकर लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों की लोगों में अच्छी मांग है।

मोहम्मद आरिफ खान, जिला परियोजना अधिकारी, रीप

समूह से जुड़ी महिलाओं को भी अब ये समझ में आने लगा है कि कलस्टर लेबल फेडरेशन समूहों में अधिक से अधिक महिलाओं को शामिल करना है। जितना बड़ा समूह होगा, सरकार की ओर से उतना ही ज्यादा उनको लाभ मिलेगा और रोजगार के अधिक विकल्प भी सृजित हो सकेंगे। जिले में महिला समूह द्वारा स्थानीय उत्पादों के आउटलेट लगाए रहे हैं, इनमें स्थानीय सब्जी,अचार सभी प्रकार के, हस्त शिल्प के उत्पाद, किवी के उत्पाद, किवी जैम , किवी चटनी, किवी जूस, मसाले, मडुवा के उत्पाद, लाल चावल, जगली शहद, घरेलू शहद, झिगुरा चावल, गडेरी, लाई, मूली, पालक धनिया आदि को बिक्री के लिए रखा जा रहा है। जिन्हें हर कोई हाथों—हाथ ले रहा है। 

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गौरतलब है कि राज्य में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कलस्टर लेवल फेडरेशन का गठन किया गया है। इसके माध्यम से समूह से जुड़ी महिलाओं को अपनी आजीविका बढाने के साथ ही राज्य सरकार की योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है।

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