बागेश्वर। घरेलू हिंसा के मामले में सास, जेठानी और ननद के खिलाफ विशिष्ट आरोप नहीं पाए जाने पर सत्र न्यायालय ने महिला की अपील खारिज कर दी। सत्र न्यायाधीश सुबीर कुमार की अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट, गरुड़ के आदेश को बरकरार रखा। निचली अदालत ने मामले में केवल पति को नोटिस जारी किया था, जबकि अन्य तीन महिलाओं को नोटिस जारी नहीं किया गया था।
मामले के अनुसार, ग्राम सिल्ली निवासी ज्योति का विवाह 7 दिसंबर 2020 को द्यौनाई निवासी ललित सिंह के साथ हुआ था। ज्योति ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत प्रार्थना पत्र देकर पति और ससुराल के अन्य सदस्यों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उसने पति पर मारपीट करने और भरण-पोषण नहीं देने का भी आरोप लगाया।
ज्योति ने अपनी जेठानी हेमा रावत पर गर्भावस्था के दौरान अनावश्यक दवा खिलाने के कारण गर्भपात होने का आरोप भी लगाया था।
निचली अदालत के आदेश को दी थी चुनौती
न्यायिक मजिस्ट्रेट, गरुड़ ने 27 फरवरी 2026 को मामले में पति ललित सिंह को नोटिस जारी किया था। हालांकि, सास धना देवी, जेठानी हेमा रावत और ननद साक्षी के खिलाफ नोटिस जारी नहीं किया गया। इस आदेश से असंतुष्ट होकर ज्योति ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की।
अदालत ने आरोपों में पाया अंतर
सत्र न्यायालय ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि पति के खिलाफ कई स्पष्ट आरोप लगाए गए हैं, जबकि सास, जेठानी और ननद के खिलाफ सामान्य आरोप थे। अदालत ने यह भी पाया कि जेठानी पर गर्भावस्था के दौरान दवा खिलाने से संबंधित आरोप में घटना की तिथि और दवा का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया था।
इन तथ्यों के आधार पर सत्र न्यायालय ने महिला की अपील खारिज कर दी और न्यायिक मजिस्ट्रेट, गरुड़ के पूर्व आदेश को बरकरार रखा।







