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एनयूजे ने न्यूज क्लिक मामले मे दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई और निर्दोष पत्रकारों की रिहाई की मांग उठाई

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देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखण्ड के मीडियाकर्मियों की प्रमुख राज्यस्तरीय पंजीकृत संस्था नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्टस ने न्यूज क्लिक मामले में स्वतंत्र रूप से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई और निर्दाेष पत्रकारों की बिना शर्त रिहाई की मांग की है।

यूनियन द्वारा प्रधान मंत्री एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्री को भेजे गये पत्र कहा गया है कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चीन के पक्ष में प्रायोजित खबरें चलाने के लिए चीनी कंपनियों से फंडिंग लेने के आरोप में न्यूज क्लिक पोर्टल के संस्थापक और प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ, एचआर विभाग के अधिकारी अमित चक्रवर्ती को गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और अन्य धाराओं के तहत गिरफ्तार करने सहित जिस तरह अभिसार शर्मा, सोहेल हाशमी, भाषा सिंह, उर्मिलेश आदि दिल्ली एनसीआर के पत्रकारों और पोर्टल के कर्मचारियों के घरों पर दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की छापेमारी हुई और उनको हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, यह अत्यंत आपत्तिजनक है। कहा गया है कि पुलिस के तौर-तरीके और पत्रकार उत्पीड़न की इस तरह की कार्यवाही पर नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स को गंभीर आपत्ति है तथा यूनियन प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चिंतित है।

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प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में यूनियन की ओर से कहा गया है कि सरकार, संबंधित एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों को देखना चाहिए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति और आलोचनात्मक आवाज़ों को उठाने पर रोक न लगे। साथ ही कठोर कानूनों के तहत अपराध की जांच में डराने-धमकाने का सामान्य माहौल भी नहीं बनना चाहिए। इससे डर और असुरक्षा का माहौल बनने के साथ देश-दुनियां में गलत संदेश जा रहा है।

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यूनियन के अध्यक्ष त्रिलोक चन्द्र भट्ट की ओर से भेजे गये पत्र में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति या संस्था ने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बाधित करने के इरादे से साजिश के तहत भारत के लिए शुत्रतापूर्ण भारतीय और विदेशी संस्थाओं द्वारा अवैध रूप से करोड़ों की विदेशी धनराशि का निवेश किया है तो निश्चित रूप से इसकी स्वतंत्र जांच करवा कर दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई की जानी चाहिये। लेकिन इसके विपरीत जो पत्रकार और मीडियाकर्मी कथित मामले में साजिश का हिस्सा नहीं हैं उनके खिलाफ बिना किसी पुख्ता सबूत और जांच के, विधिक और उत्पीड़नात्मक कार्यवाही कर प्रेस की स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जाना चाहिये।

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